लखनऊ में ‘BJP की मेयर’ के खिलाफ बगावत तेज! पार्टी विधायकों ने भी खोला मोर्चा…

BJP Mayor: यूपी के लखनऊ में भाजपा के ही मेयर और पार्षदों के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पार्षदों ने मेयर के ऊपर विकास के लिए फण्ड न देने का आरोप लगाया है। पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।

Lucknow: राजधानी में मेयर के खिलाफ भाजपा पार्षदों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्षदों के विरोध के बीच भाजपा के कुछ विधायकों ने भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली और बजट आवंटन को लेकर सवाल उठाए हैं। विधायकों का कहना है कि पार्षद किसी भी राजनीतिक दल का हो, उसे उसके क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के हिसाब से बजट मिलना चाहिए।

भाजपा विधायकों ने मेयर पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए विकास कार्यों में पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि, विकास के नाम पर घोटाले जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मेयर पक्ष का जवाब इस विवाद में महत्वपूर्ण होगा।

पार्षदों के समर्थन में उतरे भाजपा विधायक
लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से पार्षदों के बीच बजट और विकास कार्यों को लेकर असंतोष की चर्चा है। अब भाजपा पार्षदों की नाराजगी के बीच पार्टी के योगेश शुक्ला, नीरज बोरा समेत कई विधायकों ने भी सवाल उठाते हुए कहा है कि नगर निगम को सभी वार्डों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए।

विधायकों का तर्क है कि किसी वार्ड में जनता ने जिस पार्षद को चुना है, उसकी राजनीतिक पहचान के आधार पर विकास बजट तय नहीं किया जाना चाहिए। बजट का निर्धारण क्षेत्र की जरूरत और प्रस्तावित विकास कार्यों के आधार पर होना चाहिए।

‘काम के हिसाब से मिले बजट’
भाजपा विधायकों ने कहा कि पार्षद चाहे भाजपा का हो, विपक्षी दल का हो या निर्दलीय, उसके क्षेत्र की जनता को विकास योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। इसलिए बजट आवंटन काम और जरूरत के आधार पर किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि यदि किसी वार्ड में सड़क, नाली, जल निकासी, सफाई या अन्य बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है, तो राजनीतिक समीकरण के बजाय जनता की जरूरत को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

मेयर पर पक्षपात के आरोप
विरोध कर रहे पार्षदों और विधायकों की ओर से मेयर पर पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं। उनका दावा है कि सभी पार्षदों को समान तरीके से काम करने का अवसर नहीं मिल रहा है।

इसी के साथ नगर निगम के विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ भाजपा नेताओं ने विकास के नाम पर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।

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भाजपा के भीतर बढ़ता असंतोष
मेयर को लेकर भाजपा पार्षदों की नाराजगी के बीच पार्टी के विधायकों का खुलकर प्रतिक्रिया देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि मामला केवल पार्षदों तक सीमित नहीं रह गया है।

यदि भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और मेयर के बीच मतभेद आगे भी जारी रहते हैं, तो इसका असर नगर निगम की बैठकों और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है।

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पारदर्शी बजट व्यवस्था की मांग
भाजपा नेताओं का कहना है कि नगर निगम के बजट आवंटन की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। प्रत्येक वार्ड में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध बजट, स्वीकृत योजनाओं और खर्च का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि किसी तरह के पक्षपात या अनियमितता की शिकायतों को दूर किया जा सके।

फिलहाल लखनऊ नगर निगम में मेयर और भाजपा पार्षदों के बीच बढ़ती खींचतान ने स्थानीय राजनीति को गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नगर निगम नेतृत्व इन आरोपों पर क्या जवाब देता है और पार्षदों की नाराजगी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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