
रूस-जापान में फिर बढ़ा तनाव! विवादित कुरील द्वीप पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन…
Russia Japan Dispute: पुतिन के दौरे पर जापान ने जताया कड़ा विरोध, 1945 से चार द्वीपों की संप्रभुता को लेकर दोनों देशों में जारी है विवाद
Putin Visit Kuril Islands: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार जापान के दावे वाले विवादित कुरील द्वीप समूह का दौरा किया। क्रेमलिन की ओर से जारी वीडियो में पुतिन द्वीप पर एक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा करते नजर आए। उनके इस दौरे के बाद रूस और जापान के बीच दशकों पुराने क्षेत्रीय विवाद ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है।
पुतिन की यात्रा पर जापान ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि संबंधित क्षेत्र जापान का हिस्सा है। रूस और जापान के बीच प्रशांत महासागर में स्थित चार द्वीपों को लेकर करीब 80 वर्षों से विवाद चला आ रहा है। जापान इन द्वीपों को ‘नॉर्दर्न टेरिटरीज’ यानी उत्तरी क्षेत्र कहता है, जबकि रूस इन्हें कुरील द्वीप समूह का हिस्सा मानता है।
1945 से चला आ रहा है विवाद
इन द्वीपों को लेकर विवाद की जड़ द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दौर तक जाती है। वर्ष 1945 में सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद वहां रहने वाले करीब 17 हजार जापानी नागरिकों को हटना पड़ा।
कब्जे के बाद सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर हवाई और नौसैनिक सैन्य ठिकाने विकसित किए। प्रशांत महासागर में इनकी रणनीतिक स्थिति के कारण इनका सैन्य और सामरिक महत्व काफी बढ़ गया। रूस आज भी इस क्षेत्र में सैनिकों और आधुनिक सैन्य उपकरणों की तैनाती बनाए हुए है।

शांति संधि का रास्ता भी विवाद से अटका
द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद अधिकांश युद्धरत देशों ने एक-दूसरे के साथ शांति समझौते किए, लेकिन कुरील द्वीप विवाद रूस और जापान के बीच संबंधों में लगातार बाधा बना रहा।
दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय विवाद के कारण आज तक द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की पूर्ण शांति संधि पर सहमति नहीं बन सकी है। समय-समय पर दोनों देशों ने बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश जरूर की, लेकिन द्वीपों की संप्रभुता का सवाल सबसे बड़ी अड़चन बना रहा।

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पुतिन के दौरे का रणनीतिक महत्व
पुतिन का विवादित द्वीपों का दौरा केवल एक सामान्य प्रशासनिक यात्रा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। कुरील द्वीप रूस के लिए सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये द्वीप रूस के प्रशांत क्षेत्र और जापान के बीच समुद्री मार्गों के लिहाज से भी अहम स्थिति रखते हैं।
ऐसे समय में जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव जारी है और जापान भी रूस के खिलाफ कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल रहा है, पुतिन का इस क्षेत्र का दौरा मॉस्को की अपनी क्षेत्रीय स्थिति को मजबूती से प्रदर्शित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
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जापान के लिए संप्रभुता का मुद्दा
जापान लंबे समय से इन द्वीपों पर अपना दावा करता रहा है और इन्हें अपने उत्तरी क्षेत्रों का हिस्सा मानता है। टोक्यो के लिए यह केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की क्षेत्रीय व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
पुतिन के दौरे पर जापान की तीखी प्रतिक्रिया इसी वजह से सामने आई है। दोनों देशों के बीच विवाद के समाधान की राह अभी भी मुश्किल दिखाई देती है।
फिलहाल पुतिन के दौरे ने 80 साल पुराने कुरील द्वीप विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले समय में इस यात्रा का रूस-जापान संबंधों और दोनों देशों के बीच लंबित शांति समझौते की बातचीत पर क्या असर पड़ता है, इस पर दुनिया की नजर रहेगी।
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