हेड कांस्टेबल परीक्षा में नकल के आरोप, हाईकोर्ट में रिजल्ट पेश; दोबारा परीक्षा की मांग…

Head Constable Promotion Exam: पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने बंद लिफाफे में पेश किए दस्तावेज, याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग की; 31 अगस्त को अगली सुनवाई

Lucknow High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में हेड कांस्टेबल (मोटर ट्रांसपोर्ट) पद पर पदोन्नति से जुड़ी विभागीय परीक्षा के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से 176 अभ्यर्थियों का परिणाम और सीटिंग प्लान बंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।

न्यायालय को बताया गया कि इन अभ्यर्थियों के परिणाम को संभवतः अगले दिन ऑनलाइन पोर्टल पर भी जारी कर दिया जाएगा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ के समक्ष हुई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।

सभी रिकॉर्ड शपथपत्र के जरिए दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड शपथपत्र के माध्यम से न्यायालय में दाखिल किए जाएं। कोर्ट के इस निर्देश के बाद परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड को लेकर अगली सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

यह आदेश कांस्टेबल-ड्राइवर शिव बाबू मिश्रा और छह अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

यह भी पढ़ें…

NDA को मजबूत करने की तैयारी में RLD, ऐश्वर्य राज सिंह ने कार्यकर्ताओं को दिया मंत्र

5 अक्टूबर 2025 की परीक्षा को दी गई चुनौती
याचिका में 5 अक्टूबर 2025 को कांस्टेबल-ड्राइवर से हेड कांस्टेबल (मोटर ट्रांसपोर्ट) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए उसके आधार पर की गई आगे की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए हैं।

याचिका में प्रैक्टिकल/टेक्निकल एफिशिएंसी टेस्ट के लिए अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग समेत परीक्षा से संबंधित अन्य परिणामी कार्रवाइयों को भी चुनौती दी गई है।

यह भी पढ़ें…

UP News: तिरंगा यात्रा के दौरान बड़ा हादसा, तेज धूप और उमस से कई स्कूली छात्र बेहोश

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए बड़े पैमाने पर नकल और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने के कारण पूरी प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि विवादित परीक्षा को पूरी तरह निरस्त कर कड़ी निगरानी और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दोबारा परीक्षा आयोजित कराई जाए।

फिलहाल हाईकोर्ट ने 176 अभ्यर्थियों के परिणाम और सीटिंग प्लान को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की है। अगली सुनवाई में परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और याचिका में लगाए गए आरोपों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

यह भी पढ़ें…

आलू किसानों की बल्ले-बल्ले! स्टोरेज पर ₹1/kg सब्सिडी, भाव गिरने पर भी मिलेगा सहारा…

Back to top button