Stock Market: गिरावट के साथ खुला भारतीय बाजार, सेंसेक्स 332 अंक से ज्यादा टूटा

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल के दबाव से सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ खुले.

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को झटका लगा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले। कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होने के बावजूद बाजार सीमित दायरे में रहा। सेंसेक्स करीब 300 अंक गिरकर 77,800.37 पर बंद हुआ।

निफ्टी भी 65.85 अंक की गिरावट के साथ 24,330.00 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट बाजार में निवेशकों की चिंता को दर्शाती है। ट्रेंट और हिंडाल्को जैसी कंपनियों के शेयरों में 2 फीसदी की बड़ी गिरावट देखी गई।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकेतों का भी असर भारतीय बाजार पर पड़ा। भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स 300 अंक गिरा, जबकि निफ्टी 24,350 के नीचे रहा।

मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

अगर अलग-अलग सेक्टर्स की बात करें, तो आज निफ्टी मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई और यह एक फीसदी से अधिक टूट गया. मेटल के अलावा आईटी, टेलीकॉम, ऑटो (गाड़ियां) और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा. इसके विपरीत, आज कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर (घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियां) में 0.29 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जिससे इसे थोड़ी राहत मिली

क्यों आज दबाव में है शेयर बाजार?

अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी बढ़ाने की चेतावनी दी है, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध भड़कने की संभावनाएं फिर से तेज हो गई हैं. इसका असर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है, जो 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच चुका है. विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भी इस बीच भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना निवेश निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज निफ्टी का सपोर्ट लेवल 24,250-24,300 के दायरे में रहेगा, जबकि ऊपरी स्तर पर 24,600 पार करने के बाद ही कोई बड़ी तेजी देखने को मिली.

कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों का असर

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमत हाल ही में 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी, लेकिन अब यह घटकर 87.08 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है. तेल की कीमतों में इस थोड़ी गिरावट से भारतीय बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं.

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