‘दिमागी नक्सल’ कौन? PM मोदी के बयान पर सियासी घमासान, विपक्ष ने पूछे सवाल…

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद को काफी हद तक खत्म किया गया है, लेकिन अब देश के सामने विचारधारा के स्तर पर ऐसी ताकतों की चुनौती है, जो हिंसा और अराजकता के रास्ते तलाश रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत है, ताकि देश की युवा पीढ़ी को विकसित भारत के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

‘दिमागी नक्सल’ से PM का क्या मतलब?
पीएम मोदी के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि ‘दिमागी नक्सल’ से उनका इशारा किन लोगों की ओर था? विपक्षी दलों और सरकार के आलोचकों ने इस शब्द को लेकर सवाल उठाए हैं।

कुछ आलोचकों का कहना है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले युवा, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और विचारकों को इस तरह के शब्दों के जरिए निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का नाम लेकर यह नहीं कहा कि वह ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किन लोगों के लिए कर रहे हैं।

BJP ने दी बयान की व्याख्या
प्रधानमंत्री के बयान के बाद बीजेपी की ओर से इसका बचाव किया गया। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस्तेमाल किए गए शब्द को उसके व्यापक संदर्भ में समझने की जरूरत है।

उन्होंने एक टीवी डिबेट में उदाहरण देते हुए कहा कि वह व्यक्ति ‘दिमागी नक्सल’ है, जो हथियारबंद नक्सलियों को ‘Gandhians with guns’ बताता है। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर फैलाई गई उन धारणाओं का भी जिक्र किया, जिनमें इसे नागरिकता छीनने वाला कानून बताया गया था।

बीजेपी का तर्क है कि प्रधानमंत्री का निशाना सरकार की आलोचना करने वाले हर व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उन विचारों और कथित नैरेटिव्स पर है जो हिंसा, अराजकता या नक्सली विचारधारा को वैचारिक समर्थन देते हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, विपक्ष और सरकार के आलोचकों ने प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा क्या है और इसमें किन लोगों को शामिल किया जाएगा?

आलोचकों की चिंता है कि अगर इस तरह के व्यापक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है तो सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले लोगों को भी इसके दायरे में रखा जा सकता है।

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री के भाषण में किसी खास विपक्षी दल, नेता या समूह को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा गया।

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नक्सलवाद के खिलाफ सरकार का फोकस
पीएम मोदी ने अपने भाषण में सशस्त्र नक्सलवाद को लेकर सरकार की कार्रवाई और देश में हिंसा के खिलाफ उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन विचारधारा के स्तर पर हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के खिलाफ भी सतर्क रहने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनका संदेश था कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
‘दिमागी नक्सल’ शब्द ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक असहमति, नक्सली विचारधारा और राष्ट्र निर्माण को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ बीजेपी इसे हिंसा और अराजकता को वैचारिक समर्थन देने वाली सोच के खिलाफ चेतावनी बता रही है, वहीं आलोचक आशंका जता रहे हैं कि ऐसे शब्दों का दायरा बहुत व्यापक हो सकता है।

फिलहाल प्रधानमंत्री की ओर से इस शब्द की कोई विस्तृत आधिकारिक सूची या परिभाषा सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द सीधे तौर पर किसी खास वर्ग या समूह के लिए इस्तेमाल किया गया था, बिना अतिरिक्त स्पष्टता के निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।

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