
पीएफ घोटाले में Sahara Group के ट्रस्टियों पर FIR का आदेश, लखनऊ पुलिस को कोर्ट की फटकार
कर्मचारियों के वेतन से करीब 10 साल तक पीएफ काटने के बावजूद जमा न करने का आरोप.
Lucknow: सहारा ग्रुप के कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि (पीएफ) की कटौती करने के बावजूद उसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के खाते में जमा नहीं करने के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। करीब तीन महीने तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने लखनऊ पुलिस को सहारा ग्रुप के संबंधित पीएफ ट्रस्टियों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई।
पीएफ राशि जमा न करने का आरोप
आरोप है कि सहारा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन से नियमित रूप से पीएफ की कटौती की जाती रही, लेकिन पूरी राशि क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय, लखनऊ में जमा नहीं कराई गई। कर्मचारियों की शिकायत के बाद ईपीएफओ ने मामले में कार्रवाई शुरू की। इसके बाद सहारा ग्रुप की ओर से करीब 14 महीने की पीएफ राशि जमा कराई गई, लेकिन आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से काटी गई लगभग 10 वर्षों की पीएफ राशि अब भी बकाया है।
कई करोड़ रुपये से अधिक का बकाया
मामले में बकाया पीएफ राशि 1,200 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया जा रहा है। इस संबंध में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अश्वनी कुमार ने तत्कालीन लखनऊ पुलिस कमिश्नर सेंगर से भी मुलाकात की थी। आरोप है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
बताया गया कि ईपीएफओ को लखनऊ पुलिस की ओर से यह जानकारी भी दी गई थी कि शासन के पंचम तल पर तैनात एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एफआईआर दर्ज किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। इसके बाद मामला और पेचीदा हो गया। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारी की भूमिका या निर्देशों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
ईपीएफओ अधिकारी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अश्वनी कुमार ने न्यायालय का रुख किया। करीब तीन महीने चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए सहारा ग्रुप के संबंधित पीएफ ट्रस्टियों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
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एफआईआर और जांच का इंतजार
कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ेगी और कर्मचारियों के कथित बकाया पीएफ की राशि, जिम्मेदार व्यक्तियों तथा संबंधित ट्रस्टियों की भूमिका की जांच की जाएगी।
नोट: 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से संबंधित दावे को आधिकारिक दस्तावेज या पुलिस/ईपीएफओ के बयान से स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना उचित होगा।




