वाराणसी में पुलिस की बड़ी लापरवाही, चोरी के 8 दिन बाद भी नहीं दर्ज हुई FIR

Varanasi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जहां एक तरफ वीआईपी और रसूखदारों के छोटे-छोटे मामलों पर पुलिस महकमा पूरी मुस्तैदी दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक को अपने साथ हुई वारदात की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भी भटकना पड़ रहा है।

मामला वाराणसी के पुलिस कमिश्नरेट गोमती जोन के बड़ागांव थाना क्षेत्र का है, जहां चोरी की घटना के आठ दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया है।

लाखों की चोरी, बिखरा मिला सामान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़ागांव थाना क्षेत्र के ग्राम बिरापट्टी निवासी रजत कुशवाहा (पुत्र कृष्णा लाल कुशवाहा) के घर में बीते 13 अगस्त 2026 को अज्ञात चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित ने बताया कि घटना के दिन वह अपने परिवार के साथ पुराने मकान पर गए हुए थे।

आसपास के पड़ोसियों से जब उन्हें घर में हलचल और चोरी की आशंका की सूचना मिली, तो वे तुरंत मौके पर पहुंचे। घर का मुख्य दरवाजा टूटा हुआ था और कमरे के अंदर सारा सामान बिखरा पड़ा था। अलमारी व बक्सों से कीमती सामान चोरी हो चुका था।

थाने के चक्कर काट रहा पीड़ित

वारदात के तुरंत बाद पीड़ित रजत कुशवाहा ने घटना की मौखिक सूचना थाने पर दी और इसके बाद 16 अगस्त 2026 को बड़ागांव थाने में लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा। हालांकि, आरोप है कि प्रार्थना पत्र दिए जाने के कई दिन बीत जाने के बावजूद बड़ागांव पुलिस ने अब तक मामले में संज्ञान नहीं लिया और न ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

उठ रहे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय जनता में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा असंतोष है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस का रवैया केवल रसूखदारों के लिए तत्पर रहता है और आम आदमी की सुनवाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है? आम जनता पुलिस को अपनी सुरक्षा का जरिया समझे या फिर अपनी शिकायतों की अनदेखी से निराश हो? क्षेत्रवासियों ने उच्च अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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