
आस्था की अद्भुत मिसाल! 108 साल की धनी बाई कांवड़ लेकर पहुंचीं महाकाल के दरबार
Kanwar Yatra: उज्जैन में 108 वर्ष से अधिक उम्र की धनी बाई कांवड़ लेकर बाबा महाकाल के दरबार पहुंचीं। एक हाथ में कांवड़ और दूसरे में डमरू लिए उनकी भक्ति देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
Ujjain: आस्था और भक्ति की कोई उम्र नहीं होती। इस बात की मिसाल उज्जैन में देखने को मिली, जहां 108 वर्ष से अधिक उम्र की धनी बाई श्रावण मास में कांवड़ लेकर बाबा महाकाल के दरबार पहुंचीं। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी भक्ति और उत्साह देखकर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो गए।
एक हाथ में कांवड़, दूसरे में डमरू
धनी बाई जब कांवड़ लेकर महाकाल मंदिर की ओर बढ़ीं तो उनके एक हाथ में कांवड़ थी और दूसरे हाथ में डमरू। वह भक्ति में लीन होकर आगे बढ़ती रहीं। रास्ते में बाबा महाकाल के जयकारे और डमरू की थाप के बीच उनकी कांवड़ यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
उनकी इस अनोखी यात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग जुटे। धनी बाई ने मंदिर पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और भगवान का आशीर्वाद लिया।
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उम्र के आगे नहीं झुकी आस्था
108 वर्ष की उम्र में कांवड़ लेकर महाकाल के दरबार तक पहुंचना धनी बाई के अटूट विश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। उनकी भक्ति देखकर श्रद्धालुओं ने इसे आस्था की अद्भुत मिसाल बताया।
धनी बाई की कांवड़ यात्रा ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के सामने उम्र भी बाधा नहीं बनती। उनके उत्साह ने वहां मौजूद लोगों को प्रेरित किया और उनकी भक्ति चर्चा का विषय बन गई।
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सोशल मीडिया पर भी चर्चा
धनी बाई की कांवड़ यात्रा की तस्वीरें और वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। भक्ति में लीन धनी बाई का यह रूप लोगों को भावुक करने के साथ-साथ धार्मिक आस्था और इच्छाशक्ति की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
श्रावण मास में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में धनी बाई की यह अनोखी कांवड़ यात्रा इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बनी।
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