
अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा, PM मोदी-ट्रंप बैठक में भारत नहीं चाहता था सवाल-जवाब
PM Modi-Trump Meet: भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है।
सर्जियो गोर के अनुसार, जून 2026 में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिका से विशेष अनुरोध किया था कि दोनों नेताओं की बैठक में मीडिया तो मौजूद रहे, लेकिन संवाददाताओं को सवाल पूछने की अनुमति (No Press Questions) न दी जाए।
‘भारत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने की मांग’
गोर ने कहा, “हम पर्दे के पीछे थे। वहां सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप और मैं था। उन्होंने मुझसे पूछा, भारतीय किन मुद्दों को उठाने वाले हैं? हमने कुछ मुद्दों पर बात की। फिर उन्होंने पूछा कि क्या उनकी कोई मांग है? भारतीय विदेश मंत्रालय की एक मांग थी। उन्होंने हमसे कहा था कि मीडिया को अंदर आने देते हैं, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते। मैंने राष्ट्रपति को ये बात बताई। उन्होंने कहा ठीक है कोई समस्या नहीं।”
‘ट्रंप भूल गए भारत का अनुरोध’
गोर ने आगे कहा, “बैठक शुरू हुई, मीडिया अंदर आया। वहां करीब 50 कैमरे होंगे। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी आसपास बैठे थे। दोनों ने कुछ मिनट तक बात की। जैसे ही वे अपनी बात पूरी करते हैं, राष्ट्रपति सबसे पहले कैमरे की ओर देखते हैं और कहते हैं, ‘कोई सवाल?’ और इसके बाद सब कुछ खुल गया। इसके बाद 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई और सब कुछ चर्चा के लिए खुला था।”
17 जून को प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की प्रेस वार्ता से कुछ दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना ने एक जहाज पर हमला किया था, जिसमें 3 भारतीय मारे गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने ये मुद्दा ट्रंप के समक्ष उठाया था। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी चर्चा की थी। ट्रंप ने कहा कि किसी अन्य देश द्वारा हमले की स्थिति में अमेरिका भारत का समर्थन करेगा।
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PM के प्रेस वार्ता न करने पर सवाल
इससे पहले भी प्रधानमंत्री के मीडिया से मुखातिब न होने पर सवाल उठते रहे हैं। प्रधानमंत्री की यूरोप और ओशिनिया यात्रा के दौरान भी स्थानीय मीडिया ने इस मुद्दे को उठाया था।
एम्स्टर्डम और ओस्लो में पत्रकारों ने विदेश मंत्रालय के राजनयिकों से इस बारे में सवाल पूछे थे। नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग भी खासी चर्चा में थीं, जिन्होंने प्रधानमंत्री से सीधे पूछा था कि क्या वे ‘दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस’ से सवाल लेना चाहेंगे?
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