IAS दुर्गा शक्ति नागपाल अवमानना मामला, हाईकोर्ट जज ने खुद को सुनवाई से किया अलग

IAS Durga Shakti Nagpal: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और देवीपाटन मंडल (गोंडा) की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ दर्ज स्वतः संज्ञान (Suo Motu) आपराधिक अवमानना मामले में बड़ा मोड़ आया है।

मामले की सुनवाई कर रही दो सदस्यीय खंडपीठ के सदस्य न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने स्वयं को इस केस की सुनवाई से अलग (Recuse) कर लिया है। इस वजह से अब इस मामले को मुख्य न्यायमूर्ति के निर्देशानुसार 9 सितंबर 2026 को नई पीठ के समक्ष पुनः सूचीबद्ध किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद गोंडा जनपद में करीब 3 दशक से लंबित एक नजूल भूमि से जुड़े मुकदमे से संबंधित है। 

  1. सिविल जज को फोन कॉल का आरोप: गोंडा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान ने जिला जज को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि 15 जुलाई को मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने उन्हें फोन किया था। जब सिविल जज ने कोर्ट में लंबित मुकदमे पर व्यक्तिगत बात करने से इनकार किया, तो आईएएस अधिकारी ने कथित तौर पर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया और उन्हें भला-बुरा कहा।

  2. न्यायपालिका पर दबाव का मामला: एकल पीठ ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए टिप्पणी की थी कि एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा न्यायाधीश को फोन कर केस को प्रभावित करने की कोशिश न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सीधा प्रहार है।

  3. आपराधिक अवमानना की प्रक्रिया: इसके बाद मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना के तहत न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन व न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया था।

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अब 9 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव द्वारा खुद को अलग करने के बाद खंडपीठ ने आदेश दिया कि मामले को मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) या वरिष्ठ न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत कर निर्देश प्राप्त किए जाएं।

अब 9 सितंबर को नई रोस्टर/पीठ के गठित होने के बाद ही इस हाई-प्रोफाइल अवमानना याचिका पर आगे की न्यायिक कार्यवाही तय होगी।

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