
किताबों से दूर होती नई पीढ़ी, गोमती पुस्तक महोत्सव में दिल्ली LG ने कही ये अहम बात
Gomti Pustak Mahotsav: गोमती पुस्तक महोत्सव में दिल्ली LG ने कहा- डिजिटल दौर में बच्चों को पढ़ने की आदत से जोड़ना जरूरी, सिर्फ किताब पढ़ने की सलाह देना काफी नहीं
Lucknow News: लखनऊ में आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव में दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) ने बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत को लेकर अहम बात कही। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में बच्चों के पास जानकारी हासिल करने के लिए कई माध्यम मौजूद हैं, लेकिन गहराई से पढ़ने का समय लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में केवल बच्चों से किताबें पढ़ने के लिए कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें किताबों की उपयोगिता और महत्व भी समझाना जरूरी है।
किताब पढ़ने से ज्यादा जरूरी उसकी अहमियत समझना
दिल्ली के LG ने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि वे किताब पढ़ें। उन्हें यह भी बताया जाना चाहिए कि किताबें उनके ज्ञान और सोच को किस तरह व्यापक बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे किताबों के महत्व को समझेंगे, तभी पढ़ना उनके लिए केवल एक गतिविधि नहीं बल्कि सीखने और खुद को विकसित करने का माध्यम बनेगा।
डिजिटल कंटेंट के दौर में चुनौती
आज मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण बच्चों के सामने बड़ी मात्रा में कंटेंट उपलब्ध है। किसी भी विषय से जुड़ी जानकारी कुछ ही पलों में हासिल की जा सकती है। लेकिन इस तेजी के बीच किसी विषय को विस्तार से पढ़ने और समझने की आदत प्रभावित हो रही है।
ऐसे में किताबें बच्चों को किसी विषय पर एकाग्र होकर सोचने और गहराई से समझने का अवसर देती हैं। पढ़ने की नियमित आदत बच्चों के ज्ञान के साथ उनकी समझ और विचार क्षमता को भी विकसित करने में मदद कर सकती है।
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अभिभावकों और शिक्षकों को निभानी होगी भूमिका
बच्चों में पढ़ने की रुचि पैदा करने में अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका अहम है। बच्चों पर किताब पढ़ने का दबाव बनाने के बजाय उन्हें उनकी रुचि के अनुसार किताबें चुनने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
गोमती पुस्तक महोत्सव जैसे आयोजन भी बच्चों और युवाओं को किताबों से जोड़ने का मंच प्रदान करते हैं। यहां अलग-अलग विषयों और साहित्य से जुड़ी पुस्तकों के बीच पाठकों को अपनी पसंद की किताबें तलाशने का अवसर मिलता है।
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पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत
दिल्ली के LG का संदेश ऐसे समय में आया है जब डिजिटल माध्यम बच्चों की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने और किताबों के प्रति बच्चों में रुचि पैदा करने पर जोर दिया।
उनका कहना है कि बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ यह समझाना भी जरूरी है कि किताबें उनके जीवन में क्यों महत्वपूर्ण हैं। इससे पढ़ने की आदत को बोझ के बजाय सीखने और ज्ञान हासिल करने की प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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