सोलह श्रृंगार सिर्फ़ सजावट नहीं, हमारे शास्त्रों का छुपा हुआ मेडिकल सिस्टम:डॉ. मनोज त्रिपाठी

लेखक: डॉ. मनोज त्रिपाठी

Solah Shringar Science: हमारे शास्त्रों में कहा गया है “स्त्री: श्रृंगारेण शोभते…” यानी स्त्री श्रृंगार से ही शोभती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह श्रृंगार मात्र कोई बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि हमारे प्राचीन सनातन शास्त्रों में छिपा हुआ एक उन्नत मेडिकल सिस्टम था? आइए जानते हैं कि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले सोलह श्रृंगार के पीछे कौन-कौन से वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक लाभ छिपे हैं:

6 श्रृंगार: दिमाग और मन के संतुलन के लिए

  1. बिंदी / तिलक: दोनों आंखों के बीच में ‘आज्ञा चक्र’ होता है। यहाँ पर बिंदी लगाने से एकाग्रता बढ़ती है। कुमकुम की बिंदी स्वभाव से ठंडी होती है, जिससे मन शांत रहता है और सिरदर्द की समस्या में राहत मिलती है।

  2. सिंदूर: मांग में जहाँ सिंदूर भरा जाता है, वहाँ ‘ब्रह्मरंध्र’ होता है। पारंपरिक सिंदूर में हल्दी, चूना और प्राकृतिक धातु का मिश्रण होता है, जो शरीर की गर्मी को नियंत्रित करता है और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है।

  3. काजल: आँखें दिनभर धूल-मिट्टी के संपर्क में रहती हैं। पारंपरिक काजल में घी और कपूर का उपयोग होता है, जो आँखों को ठंडक पहुँचाता है, संक्रमण से बचाता है और नजर दोष से रक्षा करता है।

  4. मांग टीका: मांग टीका बिल्कुल माथे के ठीक बीच में लटकता है। आयुर्वेद के अनुसार, यहाँ से पूरे शरीर की तंत्रिकाएं (नर्व्स) जुड़ी होती हैं। इसे पहनने से मन स्थिर रहता है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।

  5. नथ: नाक के बाएं हिस्से में जहाँ नथ पहनी जाती है, वह हिस्सा सीधे गर्भाशय से जुड़ा होता है। आयुर्वेद ग्रंथ ‘सुश्रुत संहिता’ के अनुसार, नथ पहनने से प्रसव के समय होने वाला दर्द कम होता है और श्वसन संबंधी समस्याएं नहीं होतीं।

  6. कर्णफूल / झुमका: कान में जहाँ छेद किया जाता है, वहाँ भूख और याददाश्त के दो महत्वपूर्ण एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं। रोज झुमका पहनने से लगातार उन बिंदुओं पर दबाव बना रहता है, जिससे याददाश्त तेज रहती है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है।

6 श्रृंगार: दिल और शारीरिक मजबूती के लिए

  1. मंगलसूत्र / हार: गले में पहना जाने वाला हार ‘हृदय चक्र’ के पास रहता है। सोने का हार शरीर की ऊर्जा को नियंत्रित रखता है, दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

  2. बाजूबंद: बाजू पर जहाँ बाजूबंद बांधा जाता है, वहाँ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का पॉइंट होता है। इसे बांधने से हाथों की मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं और थकान कम महसूस होती है।

  3. चूड़ियाँ / कंगन: कलाई की नाड़ी पर चूड़ियों की खनक और लगातार घर्षण से रक्त संचार (Blood Circulation) तेज होता है, जिससे थकान जल्दी नहीं लगती। पारंपरिक चूड़ियों की ध्वनि से आसपास का वातावरण सकारात्मक रहता है।

  4. अंगूठी: अनामिका उंगली (Ring Finger) की नसें सीधे हृदय तक जाती हैं, इसीलिए सगाई या विवाह की अंगूठी इसी उंगली में पहनी जाती है। अंगूठी का हल्का दबाव मन को शांत और प्रेम भाव को बढ़ाता है।

  5. मेंहदी: मेंहदी की तासीर ठंडी होती है। हाथों और पैरों में मेंहदी लगाने से शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर निकलती है, जिससे तनाव और गुस्सा शांत होता है। यही कारण है कि विवाह से पूर्व दुल्हन को मेंहदी लगाई जाती है ताकि उसका मन शांत रहे।

  6. कमरबंध / तगड़ी: कमरबंध कमर की हड्डी को सीधा रखने में मदद करता है। प्रसव के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करने में यह सहायक होता है, साथ ही इससे किडनी और गर्भाशय पर उचित दबाव बना रहता है जिससे वे स्वस्थ रहते हैं।

4 श्रृंगार: गर्भ और स्वास्थ्य रक्षा के लिए

  1. बिछिया: पैर की दूसरी उंगली की नस सीधे गर्भाशय और दिल से जुड़ी होती है। चांदी की बिछिया पहनने से पीरियड्स नियमित रहते हैं, शरीर को ठंडक मिलती है और गर्भाशय मजबूत होता है। यही वजह है कि बिछिया हमेशा चांदी की पहनी जाती है, सोने की नहीं।

  2. पायल: पायल की छनक से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, चांदी की पायल पैरों की हड्डियों को मजबूत करती है, पैरों की सूजन को रोकती है और शरीर की ऊर्जा को व्यर्थ बाहर जाने से रोकती है।

  3. गजरा / फूल: बालों में लगाया जाने वाला गजरा सिर्फ सुंदरता और खुशबू के लिए नहीं है। फूलों की भीनी खुशबू दिमाग को तरोताजा रखती है और मानसिक तनाव को दूर करती है। इसके अलावा प्राकृतिक फूलों की महक बालों को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

  4. इत्र / सुगंध: सोलहवां श्रृंगार सुगंध यानी इत्र है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर की अच्छी खुशबू तन और मन दोनों को प्रसन्न रखती है, जिससे मूड अच्छा रहता है और आसपास का वातावरण सकारात्मक बनता है।

निष्कर्ष

सोलह श्रृंगार मात्र एक बाहरी दिखावा नहीं है, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति में स्त्री के स्वास्थ्य, सुहाग और आत्मविश्वास से जुड़ा एक बेहतरीन वैज्ञानिक विज्ञान है। इसमें शामिल प्रत्येक आभूषण और परंपरा शरीर को संतुलन, ठंडक और मानसिक शांति प्रदान करती है।

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