मौसम की हर हलचल पर रहेगी नजर, योगी सरकार 5 शहरों में लगा रही डॉप्लर वेदर रडार

आजमगढ़ और वाराणसी में रडार स्थापित, लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में काम जारी; मौसम की निगरानी और आपदा प्रबंधन को मिलेगी मजबूती।

Lucknow: उत्तर प्रदेश में मौसम संबंधी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और लोगों की जान बचाने के लिए योगी सरकार आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। प्रदेश में मौसम की सटीक निगरानी और गंभीर मौसमी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए पांच शहरों में अत्याधुनिक डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं। इस परियोजना पर सरकार कुल 22.45 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सरकार का मानना है कि इन रडार के माध्यम से मौसम की स्थिति पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी और आपदा से पहले जरूरी कदम उठाने में मदद मिलेगी।

UP के 5 शहरों में स्थापित होंगे डॉप्लर वेदर रडार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मौसम निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आजमगढ़, लखनऊ, झांसी, अलीगढ़ और वाराणसी में डॉप्लर वेदर रडार लगाने की योजना बनाई है।

राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के मुताबिक, पांच में से दो स्थानों आजमगढ़ और वाराणसी में रडार स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं, लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में रडार स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।

इन अत्याधुनिक उपकरणों से मौसम में होने वाले बदलावों की निगरानी करने और गंभीर मौसमी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश में मौसम संबंधी चेतावनी प्रणाली को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

250 से 500 किलोमीटर तक होगी मौसम की निगरानी
डॉप्लर वेदर रडार की मदद से तेज बारिश, आंधी-तूफान और अन्य गंभीर मौसमी घटनाओं पर नजर रखी जा सकेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रत्येक रडार की निगरानी सीमा लगभग 250 से 500 किलोमीटर तक हो सकती है।

रडार से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर मौसम की गतिविधियों का विश्लेषण करने और संभावित खतरों का पूर्वानुमान लगाने में सहायता मिलेगी। इससे प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और जरूरत के अनुसार बचाव की तैयारियां करने के लिए अधिक समय मिल सकता है।

हालांकि, मौसम का पूर्वानुमान और चेतावनी संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। रडार की स्थापना से हर आपदा का सटीक अनुमान लगने की गारंटी नहीं होती, लेकिन मौसम की निगरानी क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।

किसानों से लेकर आम लोगों तक को होगा फायदा
डॉप्लर वेदर रडार स्थापित होने से आम लोगों, किसानों और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को फायदा मिलने की उम्मीद है। मौसम खराब होने की आशंका पर समय रहते चेतावनी मिलने से प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा सकेगा और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कर सकेगा।

किसानों के लिए भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है। तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं की संभावित जानकारी मिलने पर किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा सकेंगे। इसके अलावा पशुओं की सुरक्षा और कृषि कार्यों की योजना बनाने में भी मौसम संबंधी सूचनाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं।

समय पर मौसम अलर्ट मिलने से प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

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डॉप्लर रडार परियोजना पर खर्च होंगे ₹22.45 करोड़
योगी सरकार इस परियोजना पर कुल 22.45 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसमें डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना के लिए लगभग 19.50 करोड़ रुपये और रडार साइटों पर सिविल निर्माण कार्यों के लिए 2.95 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से मौसम की निगरानी को मजबूत करना और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को बेहतर बनाना है। पांच शहरों में रडार स्थापित होने से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मौसम संबंधी आंकड़े जुटाने और चेतावनी व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।

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आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में बाढ़, तेज बारिश, आंधी-तूफान और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के दौरान समय पर सूचना मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना को मौसम निगरानी व्यवस्था के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

आजमगढ़ और वाराणसी में रडार स्थापित होने के बाद अब लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में काम पूरा होने का इंतजार है। परियोजना पूरी होने पर मौसम की निगरानी और संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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