
लखनऊ में श्रीराम कथा: गोमतीनगर में गूंजी हनुमान भक्ति, छठे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Shri Ram Katha Lucknow: राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विपुल खंड-6 में आयोजित दिव्य श्रीराम कथा के छठे दिन का सत्र पूरी तरह से भक्ति, भाव और सनातन संस्कृति के रंगों में रंगा नजर आया। हिन्दू मेला आवाहन मंच के तत्वावधान में चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पूज्य आचार्य डॉ. चंद्रांशु जी महाराज के पावन मुखारविंद से माता सीता के हरण, प्रभु श्रीराम के विरह, हनुमान जी की अद्भुत भक्ति और लंका दहन के सजीव एवं प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया गया।
कथा के दौरान पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयकारों और हनुमान जी के उद्घोष से गूंज उठा।
‘अधर्म और अहंकार का पतन निश्चित’
माता सीता के हरण के मार्मिक प्रसंग का व्याख्यान करते हुए आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अधर्म और अहंकार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः धर्म और सत्य के सामने उनका टिक पाना असंभव है। रावण का चरित्र इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि अथाह ज्ञान, अपार शक्ति और वैभव होने के बावजूद यदि किसी व्यक्ति में विवेक, मर्यादा और विनम्रता का अभाव है, तो उसका पतन तय है।
इसके बाद हनुमान जी के अद्भुत चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति, अदम्य साहस और पूर्ण समर्पण ही हनुमान जी की असली शक्ति थी। उनका समुद्र लाँघकर लंका पहुँचना, माता सीता को प्रभु का संदेश देना और पूरी लंका को अपनी पूंछ की अग्नि से भस्म करना इस बात का प्रतीक है कि जब सेवा के पीछे सच्चा समर्पण और हृदय में अटूट विश्वास हो, तब दुनिया का हर असंभव कार्य संभव हो जाता है। लंका दहन केवल एक नगर का जलना नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और बुराई के विनाश का प्रतीक है।
संस्कारों को आगे बढ़ाने का संकल्प
श्रीवेदांतिकुलम अनावासीय गुरुकुल की अध्यक्ष करिश्मा सिंह ने इस अवसर पर कहा कि हिन्दू मेला आवाहन मंच के माध्यम से इस दिव्य श्रीराम कथा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज को केवल धार्मिक आयोजनों से जोड़ना मात्र नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति, पारिवारिक संस्कारों और जीवन-मूल्यों से अवगत कराना है, ताकि इन महान आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाया जा सके।
कथा का छठा दिवस: रामराज्य स्थापना का दिव्य प्रसंग
आयोजक मंडल ने जानकारी दी कि दिव्य श्रीराम कथा के सप्तम एवं अंतिम दिवस पर प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन और भव्य रामराज्य की स्थापना के पावन प्रसंग का रसपान कराया जाएगा। रामराज्य की अवधारणा के माध्यम से धर्म, न्याय, समानता, लोककल्याण, कर्तव्यनिष्ठा और एक आदर्श शासन व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।
आयोजक ‘हिन्दू मेला आवाहन मंच’ की ओर से समस्त क्षेत्रवासियों और धर्मप्रेमियों से आग्रह किया गया है कि वे सपरिवार कथा के अंतिम दिन उपस्थित होकर पुण्य के भागी बनें। रामराज्य का यह प्रसंग हमें ऐसे आदर्श समाज की परिकल्पना सिखाता है जहाँ शासन का एकमात्र उद्देश्य जनकल्याण हो।





