
पुलिस स्मृति दिवस पर CM योगी ने शहीदों को किया नमन
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस स्मृति दिवस-2026 (Police Smriti Diwas 2026) के अवसर पर वीर अमर शहीदों के सम्मान में एक भव्य और भावुक स्मृति परेड कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत कर देश और समाज की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस बल के वीर जवानों को नमन किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर बेबाक राय रखी।
“जब अपराधी सत्ता के संरक्षण में थे”
अपने संबोधन के दौरान पिछली व्यवस्थाओं को याद करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक दौर वह भी था जब पुलिस का कोई थानेदार या एसपी भी किसी बड़े अपराधी पर हाथ डालने से पहले कई बार सोचता था। उन्होंने कहा कि अपराधी को छूते ही सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे और अगले ही कुछ घंटों में अपराधी के बजाय कर्तव्य का पालन करने वाले अधिकारी के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी जाती थी।
सीएम योगी ने तंज कसते हुए कहा कि उस समय पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय हुक्मरानों के पालतू पशुओं को खोजने के लिए जंगलों में दौड़ने पर विवश थी। थानों की हालत दयनीय थी, सीलन भरी बैरकें और तपती खपरैल छतें हुआ करती थीं। इतना ही नहीं, पीएसी (PAC) कंपनियों को ताला लगाकर बंद करने का षड्यंत्र भी सत्ता के गलियारों में रचा जाता था।
एनकाउंटर और जीरो टॉलरेंस नीति
पुलिस की कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ अपनाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जो लोग पुलिस कार्रवाई, एनकाउंटर और जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़ा करते हैं, ये वही लोग हैं जो दुर्दांत माफियाओं और आतंकवादियों की मौत पर छाती पीटते हैं, उनकी कब्रों पर जाकर मातम मनाते हैं।”
उन्होंने कहा कि जब इन्हीं माफियाओं की गोलियों से हमारा कोई निर्दोष जवान शहीद होता है, तब इन लोगों के पास उन अनाथ बच्चों के आंसू पोछने के लिए एक बूंद संवेदना भी नहीं होती। कुछ ऋण ऐसे होते हैं जिन्हें कभी चुकाया नहीं जा सकता, और शहीदों के प्रति राष्ट्र का ऋण भी ठीक वैसा ही है।
शहीदों के बलिदान को किया नमन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम उन वीर पुलिस जवानों को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा, समाज की शांति और नागरिकों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उनके बलिदान को स्मरण करते हुए मन श्रद्धा व सम्मान से भर उठता है, और उनके साहस पर मस्तक गर्व से ऊंचा होता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की महानता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने इतिहास, अपने मूल्यों और उन लोगों के योगदान को कितना सम्मान देती है, जिनके त्याग से वर्तमान सुरक्षित और भविष्य संभव हुआ है।





