बस्तर में मलेरिया का कहर! ₹68 करोड़ मिले, फिर भी मच्छरदानियां नदारद…

CGMSC: केंद्र से ₹68 करोड़ मिलने के बावजूद CGMSC ने टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की, बस्तर में मलेरिया रोकथाम पर उठे सवाल।

Bastar: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मलेरिया से बचाव के लिए केंद्र सरकार से 68 करोड़ रुपये मिलने के बावजूद मेडिकेटेड मच्छरदानियों की खरीदी नहीं हो सकी है। एक ओर संभाग में मलेरिया के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खरीदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) ने अब तक निविदा के दस्तावेज भी तैयार नहीं किए हैं।

फंड मिलने के बाद भी अटकी खरीदी
बस्तर में मलेरिया नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार करीब दो महीने पहले 68 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। इसके बावजूद ग्रामीणों को मच्छरों से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मेडिकेटेड मच्छरदानियां उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। मलेरिया नियंत्रण अभियान का 14वां चरण भी जारी है, लेकिन मच्छरदानियों की खरीदी की प्रक्रिया में तेजी नहीं आने से रोकथाम के प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं।

बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के कारण मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में मेडिकेटेड मच्छरदानियां ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण से बचाव का एक महत्वपूर्ण साधन मानी जाती हैं।

बस्तर संभाग में 8,426 लोग मलेरिया की चपेट में
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक बस्तर संभाग में 8,426 लोग मलेरिया से संक्रमित हो चुके हैं। यह आंकड़ा क्षेत्र में बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी इंतजामों की जरूरत को रेखांकित करता है।

मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में समय पर जांच, उपचार और मच्छरों से बचाव के उपाय संक्रमण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद मेडिकेटेड मच्छरदानियों की खरीदी लंबित रहने से ग्रामीणों को इनके वितरण के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

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कांकेर में 10 दिन के भीतर तीन बच्चों की मौत
कांकेर जिले में जुलाई महीने के दौरान महज 10 दिनों के भीतर तीन स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने क्षेत्र में मलेरिया और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।

बच्चों की मौत के मामलों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को नोटिस भी जारी किया था। ऐसे में मलेरिया की रोकथाम के लिए जरूरी संसाधनों की समय पर उपलब्धता का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है।

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CGMSC ने अब तक तैयार नहीं किए टेंडर दस्तावेज
मच्छरदानियों की खरीदी की जिम्मेदारी से जुड़ी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) की ओर से अब तक निविदा दस्तावेज तैयार नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि फंड उपलब्ध होने के बावजूद खरीदी आगे नहीं बढ़ सकी है।

बस्तर में मलेरिया नियंत्रण अभियान जारी है, लेकिन मेडिकेटेड मच्छरदानियों की उपलब्धता में देरी से रोकथाम के प्रयास प्रभावित होने की आशंका है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग खरीदी प्रक्रिया को कितनी जल्दी पूरा कर ग्रामीणों तक मच्छरदानियां पहुंचाता है।

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