
इजरायल चुनाव में कांटे की टक्कर, नेतन्याहू का भविष्य दांव पर; गाजा युद्ध बना बड़ा मुद्दा
Israel Elections 2026 Live: इजरायल चुनाव में नेतन्याहू की सत्ता दांव पर, 61 सीटों के बहुमत के लिए मुकाबला तेज; गाजा युद्ध और सुरक्षा बने बड़े मुद्दे।
Israel News: इजरायल में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं। चुनाव में गाजा संघर्ष, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य सेवा और न्यायिक सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। उपलब्ध कराए गए चुनावी अपडेट के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक 16.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2022 के चुनाव में इसी समय दर्ज 15.9 प्रतिशत मतदान से अधिक है। हालांकि, चुनाव के अंतिम नतीजे और नई सरकार का स्वरूप गठबंधन के समीकरणों पर निर्भर करेगा।
नेतन्याहू के सामने विपक्ष की चुनौती
इजरायल के इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को विपक्षी दलों से कड़ी चुनौती मिलने की बात कही जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और इजरायल डिफेंस फोर्सेज के पूर्व प्रमुख गादी आइज़ेनकोट विपक्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल की सुरक्षा नीति और सैन्य कार्रवाई देश की राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। मतदाता सरकार के सुरक्षा संबंधी फैसलों, गाजा युद्ध और देश की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखकर मतदान कर रहे हैं।
सुबह 10 बजे तक 16.7 प्रतिशत मतदान
चुनाव से जुड़े अपडेट के अनुसार, सुबह 10 बजे तक करीब 12 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। केंद्रीय चुनाव समिति के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 के चुनाव में इसी समय तक 15.9 प्रतिशत मतदान हुआ था।
इस बार शुरुआती घंटों में मतदान का प्रतिशत बढ़ा हुआ बताया गया। हालांकि, शुरुआती मतदान के आंकड़ों से किसी पार्टी की जीत या हार का अनुमान लगाना संभव नहीं है। अंतिम तस्वीर मतगणना और सीटों के आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
नेतन्याहू ने चुनाव में गड़बड़ी का लगाया आरोप
मतदान के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नेगेव इलाके में चुनावी गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनके दावे के मुताबिक, तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास नकदी से भरे लिफाफे तथा मंसूर अब्बास से जुड़े बैलेट पेपर मिले।
नेतन्याहू ने पुलिस की कार्रवाई का हवाला देते हुए मामले की जांच की मांग की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के आधिकारिक निष्कर्षों के बिना इन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
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इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी नेता या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना होता है।
इजरायल की चुनाव प्रणाली में किसी एक पार्टी के लिए अकेले बहुमत हासिल करना मुश्किल रहा है। इसलिए चुनाव के बाद विभिन्न दलों के बीच गठबंधन की बातचीत अहम भूमिका निभाती है। किसी पार्टी को संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए राष्ट्रीय मतों का कम से कम 3.25 प्रतिशत हासिल करना भी जरूरी है।
चुनावी सर्वे में किसे बढ़त?
दिए गए चुनावी अपडेट में अंतिम सर्वेक्षणों के हवाले से बताया गया कि गादी आइज़ेनकोट की यशार पार्टी, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी से मामूली बढ़त बनाए हुए थी। सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के खेमे को लगभग 50 सीटें और विपक्षी दलों को 52 से 56 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था।
अरब दलों को 14 से 16 सीटें मिलने के अनुमान के कारण उन्हें सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभाने वाला माना जा रहा था। हालांकि, चुनावी सर्वेक्षण केवल अनुमान होते हैं। वास्तविक परिणाम इन आंकड़ों से अलग हो सकते हैं।
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चुनाव के बाद कैसे बनेगी इजरायल की सरकार?
इजरायल में मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू होती है। आधिकारिक परिणामों और सीटों की स्थिति स्पष्ट होने पर राष्ट्रपति किसी एक नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। आम तौर पर उस नेता को गठबंधन बनाने और बहुमत जुटाने के लिए 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर समयसीमा 14 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।
इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू अपने गठबंधन के साथ सत्ता में बने रह पाएंगे या विपक्षी दल मिलकर नई सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचेंगे। इसका जवाब सीटों के अंतिम आंकड़ों और गठबंधन की बातचीत से सामने आएगा।
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