
भूटान में ग्लेशियर झील फटने से खलबली, असम और बंगाल के जिलों में बाढ़ का अलर्ट
Glacial lake outburst in Bhutan: पड़ोसी देश भूटान (Bhutan) से एक चिंताजनक खबर आ रही है। भूटान के मो चू उप-बेसिन (Mochu Sub-basin) स्थित सिंतापू यानी लेमथंग ग्लेशियर झील (Lemthang Glacial Lake) के फटने से अचानक भारी बाढ़ (GLOF) आ गई है।
झील के फटने से लगभग 74 लाख क्यूबिक मीटर पानी तेजी से निचले इलाकों की ओर बह रहा है, जिससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में भारी तबाही का खतरा मंडराने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों राज्यों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
भारत की ओर बढ़ रहा पानी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्लेशियर झील फटने के बाद उफनता पानी मो चू नदी (Mo Chhu River) से होते हुए आगे संकोश नदी (Sankosh River) की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। पानी के तेज बहाव के कारण भूटान के प्रसिद्ध गसा त्सहाचू (Gasa Tshachu) प्राकृतिक गर्म पानी के झरने के पास बने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा वहां दो बेली ब्रिज (Bailey Bridges) और कुछ सड़क मार्ग भी बह गए हैं।
A glacier lake outburst flood (GLOF) which has originated from the Sintaphu lake at Mochu subbasin Gasa has been reported.
The NCHM is currently monitoring the water level along the Mochu river at Tashithang. India has been informed. https://t.co/ArS7S73wd2
— The Bhutanese (@thebhutanese) October 29, 2026
हालांकि, गनीमत यह रही कि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण भूटान में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन और ब्रॉडकास्टिंग सर्विस के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को पहले ही सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
बंगाल और असम में प्रशासन मुस्तैद
भूटान में हुई इस प्राकृतिक आपदा का असर भारत के सीमावर्ती और मैदानी इलाकों पर पड़ सकता है, जिसे लेकर पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल क्षेत्र और असम में आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।
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सुरक्षित ठिकानों पर पलायन: खतरे की आशंका वाले संवेदनशील इलाकों से एहतियात के तौर पर हजारों नागरिकों को निकालकर सुरक्षित राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है।
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नदियों के जलस्तर पर पैनी नजर: केंद्रीय जल आयोग और स्थानीय प्रशासन मो चू और संकोश नदी बेसिन के जलस्तर पर लगातार सैटेलाइट और सेंसर के जरिए नजर बनाए हुए हैं।
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अलर्ट सायरन चालू: संभावित खतरे वाले इलाकों में चेतावनी के लिए सायरन बजाए गए हैं ताकि निचले इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क रहें।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ती चिंताएं
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन ग्लेशियर झीलों के तेजी से फैलने का मुख्य कारण बन रहा है। पिछले कुछ महीनों में नेपाल और सिक्किम के बाद अब भूटान में इस तरह की घटना का सामने आना इस बात की ओर इशारा करता है कि हिमालयी क्षेत्र की इन झीलों की मॉनिटरिंग और सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक और ठोस कदम उठाने की कितनी आवश्यकता है।
फिलहाल, भारत के एनडीआरएफ (NDRF) और राज्य प्रशासन की टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।





