इटली में महंगाई और सैन्य खर्च पर फूटा जनता का गुस्सा, सड़कों पर उतरे हजारो लोग

Italy Strike News: यूरोपीय देश इटली में बढ़ती महंगाई, लगातार गिरती क्रय क्षमता और सरकार के भारी सैन्य बजट के विरोध में आम जनता और कर्मचारी संगठनों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। शुक्रवार को ‘यूनियोने सिंदाकाले दी बेस’ (USB) सहित कई प्रमुख ट्रेड यूनियनों, छात्र संगठनों और मजदूर यूनियनों के आह्वान पर पूरे देश में व्यापक राष्ट्रव्यापी हड़ताल (Nationwide General Strike) की गई।

इस दौरान राजधानी रोम, मिलान, ट्यूरिन और बोपलोना जैसे दर्जनों प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में छात्र और श्रमिक सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

महंगाई से बेहाल जनता

प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध इटली में बेकाबू होती महंगाई और जरूरी सामानों की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर है। ट्रेड यूनियन USB के प्रतिनिधियों का कहना है कि साल 2021 के बाद से देश में वास्तविक मजदूरी (Real Wages) में 9.4 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जिससे 54 लाख से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी में जीने को मजबूर हो गए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों और मजदूरों ने कहा कि देश में स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं, जबकि आम जनता के लिए महीने का खर्च चलाना और भोजन का प्रबंध करना भी चुनौती बन चुका है।

युद्ध बजट का विरोध

इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का एक बड़ा पहलू सरकार की सैन्य नीतियों और रक्षा बजट में की जा रही बढ़ोतरी का विरोध भी था। प्रदर्शनकारियों और शांति कार्यकर्ताओं ने मांग की कि सरकार को रक्षा सौदों और रीआर्मामेंट पर पैसा खर्च करने के बजाय आम नागरिकों के वेतन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बंदरगाह कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों ने कमर्शियल पोर्ट्स के जरिए युद्ध क्षेत्रों में हथियारों की आवाजाही पर तुरंत रोक लगाने की मांग उठाई।

सरकार का कड़ा रुख

हड़ताल के व्यापक असर को देखते हुए इटली के परिवहन मंत्रालय ने आपातकालीन कदम उठाए। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन, रेलवे और विमानन सेवाओं के कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने पर प्रतिबंधात्मक अध्यादेश जारी किया, ताकि आम जनता की आवाजाही पूरी तरह बाधित न हो।

परिवहन मंत्री मैटेओ साल्विनी ने आदेश का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों और यूनियनों पर भारी प्रशासनिक जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। बावजूद इसके, मिलान और रोम जैसे शहरों में कई बस और ट्राम रूट प्रभावित हुए तथा विरोध मार्च के कारण यातायात बुरी तरह चरमरा गया।

इन जगहों दिखा हड़ताल का असर

परिवहन सेवाओं में आंशिक छूट के बावजूद शिक्षा क्षेत्र, विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और सार्वजनिक प्रशासन इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल से खासे प्रभावित रहे। इटली की प्रमुख यूनिवर्सिटीज के छात्रों ने विरोध मार्च में भाग लिया और शैक्षणिक परिसरों के बाहर प्रदर्शन किए।

सुरक्षा के लिहाज से इटली की पुलिस और सुरक्षा बलों को सभी बड़े शहरों में मुस्तैद रखा गया था। विपक्षी दलों और श्रमिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने वेतन वृद्धि और आवश्यक वस्तुओं पर मूल्य नियंत्रण लागू नहीं किया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

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