
त्रिपुरा में HIV की चपेट में आए 828 छात्र, 47 की एड्स से मौत
Tripura Students HIV cases: त्रिपुरा के स्कूल में स्टूडेंट्स में AIDS बीमारी होने का गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 828 स्टूडेंट्स एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं।
त्रिपुरा में स्कूल जाने वाले स्टूडेंट्स में AIDS के गंभीर मामले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। प्रदेश में 828 स्टूडेंट्स एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें से 47 छात्रों की इस संक्रमण के चलते मौत हो चुकी है। ये रिपोर्ट सामने आते ही सनसनी फेल गई, जिसके बाद स्पष्टीकरण देते हुए प्रदेश सरकार ने कहा कि ये आंकड़े 25 साल पुराने हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में भारत में 3.14 मिलियन लोग HIV/AIDS से पीड़ित थे। फिलहाल जो आंकड़े TSACS ने जारी किए हैं वह चौंका देने वाले हैं।
स्टूडेंट्स में कैसे फैला इंफेक्शन?
त्रिपुरा एड्स नियंत्रण सोसाइटी (टीएसएसीएस) के अधिकारियों ने बताया है कि एचआईवी (Tripura Students HIV cases) के मामलों में बढ़ोत्तरी का कारण छात्रों में नशीली दवाओं का दुरुपयोग हो सकता है. टीएसएसीएस ने लगभग 220 स्कूलों और 24 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ऐसे छात्रों की पहचान की है जो इंजेक्शन के जरिए नशीली दवाएं लेते हैं।
टीएसएसीएस के संयुक्त निदेशक द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, “अब तक 220 स्कूलों और 24 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की पहचान की गई है, जहां छात्रों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग की लत पाई गई है. हमने राज्य भर में कुल 164 स्वास्थ्य सुविधाओं से डेटा इक्ठ्ठा किया है. उन्होंने आगे कहा, “ज़्यादातर मामलों में बच्चे अमीर परिवारों से होते हैं, जो एचआईवी से संक्रमित पाए जाते हैं.
WHO के मुताबिक, एड्स कोई बीमारी नहीं है लेकिन इसके होने पर इम्यूनिटी इतनी कमजोर हो जाती है कि बारी बीमारियों की चपेट में शरीर बड़ी ही आसानी से आ जाता है और फिर उससे उबर नहीं पाता है। बता दें जब कोई व्यक्ति एचआईवी संक्रमित हो जाता है तो उसमें विषाणु भार बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, ऐसे में वो व्यक्ति बहुत आसानी से दूसरों को एचआईवी संक्रमित कर सकता है. वहीं यदि एचआईवी पीड़ित व्यक्ति को इलाज न मिले तो वो ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक जिंदा रह सकता है. हालांकि यदि व्यक्ति को इलाज मिल जाए तो वो सेहतमंद जिंदगी जी सकता है, लेकिन इसकी दवा आजिवन लेनी होती है.





