
गोमती किनारे हरियाली का महाअभियान, 297 स्थानों पर लगेंगे 31.37 लाख पौधे…
Lucknow News: उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत इस वर्ष व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने जा रही है। इस अभियान में राजधानी लखनऊ और गोमती नदी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरकार की योजना के अनुसार गोमती नदी के किनारे स्थित 297 चिन्हित स्थानों पर 31.37 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए 1,521.50 हेक्टेयर क्षेत्र चिह्नित किया गया है।
गोमती नदी के संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोमती नदी के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण से नदी तटों पर हरित आवरण बढ़ेगा, मिट्टी के कटाव में कमी आएगी और जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही नदी के पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित करने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी यह अभियान अहम भूमिका निभाएगा।
13 प्रमुख नदियों के किनारे होगा वृक्षारोपण
सरकार ने केवल गोमती नदी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की 13 प्रमुख नदियों के किनारों पर भी बड़े स्तर पर पौधरोपण का लक्ष्य तय किया है। इन सभी नदी तटों पर मिलाकर 3.83 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। यह अभियान उत्तर प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े पर्यावरणीय अभियानों में से एक माना जा रहा है।
जनभागीदारी से सफल होगा अभियान
पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग के साथ ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विभिन्न सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। सरकार का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी सुनिश्चित करना है, ताकि पौधों के जीवित रहने की दर अधिक बनी रहे।
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पर्यावरण और जलवायु के लिए होगा लाभदायक
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी किनारे विकसित होने वाली हरित पट्टी से कार्बन अवशोषण बढ़ेगा, वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा पक्षियों और अन्य वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास मिलेगा, जबकि बाढ़ और भूमि कटाव जैसी समस्याओं को भी कम करने में सहायता मिलेगी।
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हरित उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार का कहना है कि पौधरोपण महायज्ञ-2026 केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का जनआंदोलन है। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पौधरोपण और उनकी देखभाल सफलतापूर्वक होती है, तो आने वाले वर्षों में गोमती सहित प्रदेश की सभी प्रमुख नदियों के तट अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध बन सकेंगे।
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