पीएम आवास योजना में रिश्वतखोरी का आरोप, किस्त जारी करने के बदले मांगे 30 हजार रुपये!

Mainpuri Viral Video: उत्तर प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच मैनपुरी जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। वीडियो में एक व्यक्ति खुद को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभार्थी बताते हुए आरोप लगा रहा है कि उससे आवास की पहली किस्त जारी कराने के बदले 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है।

वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति भावुक होकर अपनी परेशानी बयां करता नजर आ रहा है। उसका दावा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसका आवास पहले ही स्वीकृत हो चुका है और पहली किस्त जारी होने का संदेश भी उसके मोबाइल फोन पर प्राप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक उसके बैंक खाते में धनराशि नहीं पहुंची है।


“14 बार लगा चुका हूं कार्यालय के चक्कर”
पीड़ित का आरोप है कि वह इस समस्या के समाधान के लिए अब तक करीब 14 बार संबंधित कार्यालय के चक्कर लगा चुका है। हर बार उसे अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया गया।

उसके मुताबिक, जब वह मामले की जानकारी लेने के लिए संबंधित डूडा कार्यालय पहुंचा, तो वहां मौजूद एक कर्मचारी ने कथित तौर पर उससे कहा कि उसके बैंक खाते में तकनीकी समस्या है और जब तक वह 30 हजार रुपये नहीं देगा, तब तक आवास योजना की किस्त उसके खाते में नहीं पहुंचेगी।

रिश्वत मांगने के आरोप से मचा हड़कंप
वीडियो में लगाए गए आरोपों ने स्थानीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला होगा, बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और बेघर परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना की राशि जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने जैसे आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं।

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प्रशासनिक जांच की मांग
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी ने लाभार्थी से अवैध धनराशि की मांग की है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
इस मामले में यह भी उल्लेखनीय है कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से त्वरित कार्रवाई तथा पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

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