पॉलिसी की पूरी जानकारी नहीं दी तो फंसेगा बैंक! कंज्यूमर कोर्ट ने ₹10.6 लाख रिफंड का सुनाया फैसला

Consumer Commission Order: हैदराबाद कंज्यूमर कमीशन का बड़ा फैसला, 73 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर को बिना पूरी जानकारी के बेची गई थी पॉलिसी; बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को ₹10.6 लाख लौटाने के आदेश.

Mis-Selling Case: इंश्योरेंस पॉलिसी बेचते समय ग्राहक को पूरी और सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। सिर्फ दस्तावेजों पर ग्राहक के हस्ताक्षर होने से यह साबित नहीं होता कि उसने पॉलिसी की सभी शर्तों को समझकर सहमति दी थी। हैदराबाद कंज्यूमर कमीशन के एक अहम फैसले में 73 वर्षीय रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर को राहत देते हुए बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को कुल 10.6 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया गया है।

यह मामला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें बैंक या वित्तीय संस्थानों के माध्यम से इंश्योरेंस या निवेश से जुड़ी पॉलिसी बेची जाती है। कमीशन ने मामले की सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि ग्राहक की वास्तविक और सूचित सहमति जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद की 73 वर्षीय रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर ने आरोप लगाया था कि उन्हें पर्याप्त जानकारी दिए बिना इंश्योरेंस पॉलिसी बेच दी गई। महिला का कहना था कि पॉलिसी की प्रकृति और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण शर्तों के बारे में उन्हें पूरी तरह जानकारी नहीं दी गई थी।

मामला हैदराबाद डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के सामने पहुंचा। मामले की सुनवाई के बाद कमीशन ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया।

कोर्ट ने क्या कहा?
कंज्यूमर कमीशन ने माना कि केवल पॉलिसी से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि ग्राहक ने सभी शर्तों को समझकर और पूरी जानकारी के आधार पर सहमति दी थी।

कमीशन के अनुसार, इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने की प्रक्रिया में ग्राहक को उत्पाद की प्रकृति, शर्तों और उससे जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की पर्याप्त जानकारी देना जरूरी है। खासकर तब, जब ग्राहक की ओर से यह दावा किया जा रहा हो कि उसे पॉलिसी की सही जानकारी नहीं दी गई।

₹10 लाख का निवेश वापस करने का आदेश
कमीशन ने इंश्योरेंस कंपनी को पॉलिसी बंद करने और महिला द्वारा निवेश किए गए 10 लाख रुपये वापस करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से महिला को 50,000 रुपये मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया गया है। महिला के मुकदमे से जुड़े खर्च के लिए 10,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया गया।

इस तरह आदेश के तहत महिला को कुल 10.60 लाख रुपये की राहत मिलनी है।

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Mis-Selling क्या होती है?
जब किसी ग्राहक को किसी वित्तीय उत्पाद या इंश्योरेंस पॉलिसी की पूरी और सही जानकारी दिए बिना उसे बेच दिया जाता है, तो इसे आम तौर पर Mis-Selling यानी गलत तरीके से बिक्री कहा जाता है।

इसमें पॉलिसी की शर्तों, जोखिम, रिटर्न, लॉक-इन अवधि या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाना शामिल हो सकता है।

ग्राहकों को किसी भी इंश्योरेंस या निवेश उत्पाद को खरीदने से पहले उसके दस्तावेजों और नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। किसी एजेंट या बैंक कर्मचारी की मौखिक जानकारी के आधार पर ही फैसला लेने से बचना भी जरूरी है।

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उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
हैदराबाद कंज्यूमर कमीशन का यह आदेश इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि ग्राहक के हस्ताक्षर को हमेशा उसकी पूरी और सूचित सहमति का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। यदि ग्राहक यह साबित कर सके कि उसे उत्पाद की महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई थी, तो उपभोक्ता आयोग में शिकायत के जरिए राहत मांगी जा सकती है।

यह फैसला बैंकिंग और इंश्योरेंस क्षेत्र में ग्राहकों को वित्तीय उत्पाद बेचने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सही जानकारी की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

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