अमेरिका-ईरान डील पर श्रेय की जंग, ट्रम्प और गालिबाफ के दावों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

US Iran Pesce Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच कूटनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि दशकों में पहली बार ईरान अमेरिका और उसके राष्ट्रपति के प्रति सम्मानजनक रवैया अपना रहा है, जबकि ईरान ने इस पूरे समझौते को अमेरिका की हार और अपनी रणनीतिक जीत करार दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ईरान इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है और वह समझौते के लिए लगभग हर शर्त मानने को तैयार दिखाई दे रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि कई वर्षों में पहली बार ईरान अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रति सम्मान दिखा रहा है।

ट्रम्प के इस बयान को अमेरिकी प्रशासन की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि आर्थिक प्रतिबंधों, अंतरराष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय रणनीति ने ईरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया है।

ईरान ने किया पलटवार
हालांकि ट्रम्प के दावों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरानी संसद के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ हुआ तथाकथित “इस्लामाबाद समझौता” अंततः अमेरिका की हार साबित हुआ है।

अजरबैजान में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गालिबाफ ने कहा कि ईरान ने किसी दबाव, भय या मजबूरी में यह समझौता स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरी तरह ईरान की शर्तों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया गया है।

गालिबाफ ने कहा कि ईरान ने हमेशा अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और आगे भी किसी बाहरी दबाव के आगे झुकने का सवाल ही नहीं उठता।

समझौते को लेकर अलग-अलग दावे
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि किसी भी समझौते के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने घरेलू राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए खुद को विजेता साबित करने की कोशिश करते हैं।

अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन इस समझौते को अपनी सख्त विदेश नीति और दबाव की रणनीति की सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। वहीं ईरानी नेतृत्व अपने नागरिकों और समर्थकों को यह संदेश देना चाहता है कि देश ने किसी भी प्रकार का समझौता दबाव में आकर नहीं किया है।

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मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ेगा असर
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में आई यह नरमी मध्य पूर्व की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। तेल बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

हालांकि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिबंधों जैसे कई मुद्दों पर मतभेद अभी भी बरकरार हैं।

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कूटनीतिक जीत की लड़ाई जारी
फिलहाल यह साफ है कि समझौते के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी रहेगी। एक तरफ ट्रम्प इसे अमेरिकी दबाव की जीत बता रहे हैं, वहीं ईरान इसे अपनी रणनीतिक सफलता के तौर पर पेश कर रहा है।

अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह समझौता आने वाले महीनों में दोनों देशों के रिश्तों को किस दिशा में ले जाता है और क्या यह मध्य पूर्व में स्थिरता का नया अध्याय साबित होगा या फिर केवल अस्थायी राहत बनकर रह जाएगा।

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