
मिशन 2027 की बिसात बिछाने में जुटी BJP… योगी कैबिनेट विस्तार की पटकथा तैयार
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2026 की शुरुआत बड़े सियासी बदलावों के संकेत दे रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने के इरादे से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष पद पर पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हैं।
मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई हाई-प्रोफाइल कोर कमेटी बैठक ने यह साफ कर दिया है कि संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर बड़े फेरबदल की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।
सीएम आवास पर मैराथन कोर कमेटी बैठक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग पर बीजेपी कोर कमेटी की सवा घंटे से ज्यादा लंबी बैठक चली। इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री योगी के साथ नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक, तथा संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य एजेंडा 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करना, संगठन में नई ऊर्जा भरना और सरकार के प्रदर्शन को और मजबूत बनाना रहा। पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यह मुख्यमंत्री योगी के साथ उनकी पहली औपचारिक और निर्णायक मुलाकात मानी जा रही है।
योगी कैबिनेट में 6 नए चेहरों की एंट्री संभव
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, योगी मंत्रिमंडल में खाली पड़े 6 पदों को भरने की तैयारी अंतिम चरण में है। फिलहाल मंत्रिमंडल में 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक रूप से अधिकतम संख्या 60 हो सकती है।
चर्चा है कि 14 जनवरी को खरमास समाप्त होने के बाद जनवरी के तीसरे सप्ताह में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है और नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण कराया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि इस विस्तार के जरिए 2024 के लोकसभा चुनावों में बिगड़े कुछ राजनीतिक समीकरणों को दुरुस्त करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही संगठन में सक्रिय और प्रभावशाली नेताओं को सरकार में जिम्मेदारी देकर जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जाएगा।
भूपेंद्र चौधरी की वापसी की अटकलें
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बड़ी चर्चा यह भी है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को फिर से कैबिनेट में जगह मिल सकती है। वह पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका खासा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है।
यदि उनकी वापसी होती है, तो यह पश्चिमी यूपी के जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से बीजेपी का बड़ा दांव होगा।
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जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस
बीजेपी इस बार किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। पार्टी का पूरा जोर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर है। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी—दोनों पूर्वांचल से आते हैं। ऐसे में सत्ता और संगठन में पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और मध्य यूपी के नेताओं को कैबिनेट में तरजीह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बीजेपी की रणनीति साफ है—
- पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति के प्रभाव को कम करना
- अपने ओबीसी और दलित वोट बैंक को फिर से मजबूती से एकजुट करना
- क्षेत्रीय असंतुलन की धारणा को खत्म करना
दिल्ली से हरी झंडी का इंतजार
कोर कमेटी की बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दिल्ली रवाना हो गए हैं। वहां वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लखनऊ में हुए मंथन की विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व से अंतिम मंजूरी मिलते ही मंत्रियों के नामों की सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी।
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2027 से पहले एंटी-इनकंबेंसी कम करने की कोशिश
बीजेपी की रणनीति बिल्कुल स्पष्ट है। 2027 के विधानसभा चुनावी समर में उतरने से पहले:
- सरकार में नए चेहरे लाकर एंटी-इनकंबेंसी को कम किया जाए,
- संगठन में उन नेताओं को आगे बढ़ाया जाए जिनकी अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ और जनाधार है,
- और जनता के बीच यह संदेश दिया जाए कि पार्टी लगातार आत्ममंथन और सुधार की प्रक्रिया में है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि योगी कैबिनेट का यह संभावित विस्तार मिशन 2027 की दिशा में बीजेपी का सबसे अहम कदम साबित हो सकता है।
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