
जल सत्याग्रह के दौरान महिला की मौत का दावा, पति और प्रशासन ने बताई अलग बात
Jal Satyagraha: रीवा में 28 हजार करोड़ की परमाणु परियोजना का विरोध जारी, आदिवासी महिला की मौत पर पति और प्रशासन ने जल सत्याग्रह से संबंध नकारा।
MP News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोध के बीच आदिवासी महिला विमला कोल की मौत का मामला सामने आया है। महिला के जल सत्याग्रह में शामिल होने की खबरों पर उसके पति और बेटे ने सवाल उठाए हैं। जिला प्रशासन ने भी मौत का जल सत्याग्रह से संबंध होने के दावे को खारिज किया है।
रीवा में परमाणु प्लांट के विरोध के दौरान महिला की मौत
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रस्तावित दो परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को लेकर विरोध प्रदर्शन के बीच एक आदिवासी महिला की मौत से मामला चर्चा में आ गया है। स्थानीय खबरों के अनुसार, सराय गांव की रहने वाली विमला कोल कई दिनों से परियोजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में शामिल थीं। बताया गया कि उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि महिला अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ गांव के तालाब में जल सत्याग्रह कर रही थीं। हालांकि, महिला के पति, बेटे और जिला प्रशासन ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि महिला की मौत जल सत्याग्रह के दौरान नहीं हुई और इसका विरोध प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं था।
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पति ने बताया, बुधवार शाम घर लौट आई थीं विमला कोल
मृतक महिला के पति के अनुसार, विमला कोल बुधवार शाम को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद घर लौट आई थीं। उन्होंने बताया कि महिला की मौत जल सत्याग्रह के दौरान नहीं हुई थी। उनके मुताबिक, वह सुबह शौच के लिए गई थीं, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि विमला कोल पिछले चार दिनों से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रही थीं। हालांकि, उनकी मौत की परिस्थितियों और जल सत्याग्रह से किसी संभावित संबंध को लेकर उपलब्ध जानकारी में विरोधाभास है। ऐसे में घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि आधिकारिक जांच या अन्य विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही की जा सकती है।
28 हजार करोड़ रुपये के निवेश से प्रस्तावित हैं दो परमाणु संयंत्र
रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना में 220 मेगावाट क्षमता वाले दो परमाणु ऊर्जा संयंत्र प्रस्तावित हैं। परियोजना में करीब 28,000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान बताया गया है।
परियोजना को लेकर आसपास के गांवों के निवासी जमीन, पानी, जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि परियोजना से जुड़े फैसलों में उनकी चिंताओं और क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को ध्यान में रखा जाए।
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लालगांव में भी ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन
परियोजना के विरोध में पास के लालगांव के निवासियों ने भी शुक्रवार को प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रस्तावित संयंत्रों से जमीन, जल संसाधनों, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई।
प्रदर्शनकारियों की आशंकाओं के बीच परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना अभी शुरुआती मूल्यांकन के चरण में है। प्रशासन के अनुसार, अब तक परियोजना के लिए किसी जमीन का आवंटन नहीं किया गया है।
प्रशासन के मुताबिक, अभी शुरुआती चरण में है परियोजना
जिला प्रशासन के बयान के अनुसार, प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना अभी शुरुआती मूल्यांकन के स्तर पर है। इसलिए परियोजना से संबंधित आगे की प्रक्रिया और जमीन आवंटन की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल, विमला कोल की मौत और जल सत्याग्रह से उसके कथित संबंध को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। महिला के परिजनों और प्रशासन ने इस संबंध को नकारा है। मौत के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे जल सत्याग्रह से हुई मौत कहना उचित नहीं होगा।
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