‘उद्योग’ की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कांग्रेस नाराज, जयराम रमेश ने उठाए सवाल

Supreme Court Industry Definition Verdict:

Delhi: कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के ‘उद्योग’ की कानूनी परिभाषा से जुड़े हालिया फैसले पर चिंता जताई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ऐसे समय में श्रम संबंधों को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है, जब निजी क्षेत्र की ओर से सेवाएं उपलब्ध कराने की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र की औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में पहले ही श्रमिकों के लिए जरूरी कई सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला श्रम क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 6:3 के बहुमत से सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त को 6:3 के बहुमत से ‘उद्योग’ की परिभाषा से जुड़े अहम मामले में फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा कि 1978 में दिए गए अपने पुराने फैसले में तय की गई श्रम हितैषी और व्यापक ‘उद्योग’ की परिभाषा को औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की व्याख्या का आधार नहीं बनाया जा सकता।

यह मामला औद्योगिक संबंधों और श्रम कानूनों की व्याख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने की सुनवा
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। बहुमत के फैसले में पीठ ने यह भी कहा कि ‘उद्योग’ की परिभाषा से संबंधित 1978 के सात सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार के लिए भेजा गया संदर्भ वैध था।

इस फैसले के बाद पुराने न्यायिक दृष्टिकोण और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत ‘उद्योग’ की अवधारणा को लेकर कानूनी स्थिति पर नई बहस शुरू हुई है।

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जयराम रमेश ने उठाए श्रमिक हितों से जुड़े सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 2026 का बहुमत वाला फैसला पुराने दृष्टिकोण को दो महत्वपूर्ण तरीकों से सीमित करता है। उन्होंने दावा किया कि इसका असर श्रम संबंधों और कर्मचारियों से जुड़े अधिकारों की व्याख्या पर पड़ सकता है।

उन्होंने मोदी सरकार की औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस कानून में श्रमिकों को उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्था पहले ही कमजोर की गई है।

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निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका के बीच फैसले पर बहस
जयराम रमेश के मुताबिक, देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में ‘उद्योग’ की कानूनी परिभाषा में बदलाव और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से श्रम संबंधों को लेकर नई कानूनी एवं प्रशासनिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला जहां औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस ने इसके श्रमिकों और श्रम संबंधों पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। इससे आने वाले समय में श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

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