Ayodhya से जुड़ा प्रेरक प्रसंग… रामलला के दर्शन के बाद छूटा अपराध का रास्ता

RSS Chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा प्रसंग साझा किया, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक और प्रेरित दोनों कर दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रामलला मंदिर के दर्शन ने एक जेबकतरे की जिंदगी की दिशा ही बदल दी और उसने अपराध का रास्ता छोड़कर ईमानदारी से जीवनयापन शुरू कर दिया।

पहली कार सेवा के बाद की घटना
मोहन भागवत ने बताया कि यह घटना उस समय की है जब राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान पहली कार सेवा संपन्न हो चुकी थी और कार सेवक अपने-अपने घर लौट चुके थे। उस समय वह एक जिले में प्रचारक के रूप में कार्य कर रहे थे और कार सेवा में शामिल लोगों से मिलकर यह जानने का प्रयास कर रहे थे कि इस यात्रा और अनुभव का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा।

इसी क्रम में उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने अपनी कहानी सुनाकर सभी को चौंका दिया।

मंदिर के बाहर मिला पंक्चर बनाने वाला युवक
भागवत के अनुसार, एक मंदिर के बाहर सड़क किनारे एक व्यक्ति साइकिल और मोटरसाइकिल के पंक्चर बनाने का काम कर रहा था। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनका परिचय उस व्यक्ति से कराया। बातचीत के दौरान उस व्यक्ति ने बताया कि वह पहले जेब काटने का काम करता था और चोरी-चकारी के जरिए अपना जीवन चलाता था।

उसने कहा कि कार सेवा के दौरान उसे रामलला मंदिर में दर्शन करने का अवसर मिला। उन दर्शन और वहां के माहौल ने उसके मन पर गहरा प्रभाव डाला।

दर्शन के बाद लिया नया संकल्प
भागवत ने बताया कि उस व्यक्ति ने उनसे कहा कि रामलला के दर्शन के बाद उसे महसूस हुआ कि वह गलत रास्ते पर चल रहा है। उसने उसी समय यह संकल्प लिया कि अब वह किसी की जेब नहीं काटेगा और मेहनत-मजदूरी करके ईमानदारी से अपना जीवन बिताएगा।

इसके बाद उसने जेबकतरी छोड़ दी और पंक्चर बनाने का छोटा-सा काम शुरू कर दिया। आजीविका भले ही सीमित थी, लेकिन उसे अपने काम और जीवन से संतोष था।

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आस्था और आत्मपरिवर्तन का उदाहरण
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने इस घटना को केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि आस्था और आत्मपरिवर्तन की शक्ति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल कानून या दंड से नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर जागृत होने वाले नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से भी आते हैं।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जब व्यक्ति के भीतर आत्मबोध और जिम्मेदारी की भावना पैदा होती है, तब वह अपने जीवन की दिशा बदल सकता है और समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

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प्रेरणा देने वाला प्रसंग
मोहन भागवत द्वारा साझा किया गया यह प्रसंग इस बात का संदेश देता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि व्यक्ति के भीतर बदलाव की इच्छा जाग जाए तो वह अपने अतीत को पीछे छोड़कर नई शुरुआत कर सकता है। एक जेबकतरे का मेहनतकश नागरिक बन जाना इसी परिवर्तन और आत्मविश्वास का उदाहरण माना जा रहा है।

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