‘मैं वैज्ञानिक हूं, लेकिन सम्मान कला के लिए मिल रहा है’, पद्मश्री से पहले बोले अनिल रस्तोगी

Padma Shri Anil Rastogi: देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से सम्मानित होने जा रहे वरिष्ठ रंगकर्मी और पूर्व वैज्ञानिक अनिल कुमार रस्तोगी की कहानी प्रतिभा, समर्पण और जुनून का अद्भुत उदाहरण है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें कला के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान प्रदान करेंगी।

लखनऊ के रहने वाले अनिल कुमार रस्तोगी ने अपने जीवन में विज्ञान और कला, दोनों क्षेत्रों में ऐसी पहचान बनाई है, जो बेहद कम लोगों को हासिल होती है। एक ओर उन्होंने वैज्ञानिक के रूप में दशकों तक देश की सेवा की, वहीं दूसरी ओर रंगमंच, रेडियो, टेलीविजन और फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा से लाखों लोगों का दिल जीता।

लखनऊ से शुरू हुई प्रेरणादायक यात्रा
अनिल कुमार रस्तोगी का जन्म, पालन-पोषण, शिक्षा और पेशेवर जीवन का बड़ा हिस्सा लखनऊ में ही बीता। उन्होंने स्वयं कहा कि उनका पूरा जीवन इस शहर से जुड़ा रहा है।

उन्होंने बताया कि लखनऊ के सांस्कृतिक माहौल और स्थानीय रंगमंच गतिविधियों ने उन्हें बचपन से ही अभिनय की ओर आकर्षित किया। मोहल्ले में होने वाले नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखकर उनके भीतर अभिनय का बीज अंकुरित हुआ, जो समय के साथ एक विशाल वृक्ष बन गया।

वैज्ञानिक के रूप में लंबा और सफल करियर
रस्तोगी ने वर्ष 1962 में लखनऊ स्थित Central Drug Research Institute में जूनियर रिसर्च फेलो के रूप में अपने वैज्ञानिक करियर की शुरुआत की। अगले चार दशकों तक उन्होंने जैव रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

वर्ष 2003 में वह संस्थान में जैव रसायन विभाग के प्रमुख और निदेशक ग्रेड वैज्ञानिक के पद से सेवानिवृत्त हुए। वैज्ञानिक जीवन के दौरान उन्होंने अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया।

प्रयोगशाला से मंच तक का सफर
वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ रस्तोगी ने रंगमंच के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। उन्होंने 1000 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियों में अभिनय किया और भारतीय रंगमंच की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

उनकी अभिनय प्रतिभा केवल मंच तक सीमित नहीं रही। उन्होंने 1971 में आकाशवाणी के लिए ऑडिशन दिया और चयनित हुए। इसके बाद 1975 में दूरदर्शन के लिए भी उनका चयन हुआ और उन्होंने टेलीविजन माध्यम में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

फिल्मों और टीवी में भी बनाई पहचान
रस्तोगी की पहली फिल्मी उपस्थिति वर्ष 1986 में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक Sudhir Mishra की फिल्म Yeh Woh Manzil To Nahin में हुई।

हालांकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान वर्ष 1989 में प्रसारित लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक Udaan से मिली। इस धारावाहिक में उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बशीर अहमद की भूमिका निभाई थी, जो मुख्य पात्र के मार्गदर्शक और गुरु के रूप में दिखाई दिए थे।

उनकी इस भूमिका को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने काफी सराहा था।

“मैं वैज्ञानिक हूं, लेकिन सम्मान कला के लिए मिल रहा है”
पद्मश्री सम्मान मिलने पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए अनिल कुमार रस्तोगी ने कहा कि उनके लिए यह सम्मान बेहद विशेष है क्योंकि उनका मूल पेशा विज्ञान रहा है, जबकि उन्हें सम्मान कला के क्षेत्र में दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शायद वह उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जिनका पेशेवर जीवन विज्ञान में रहा, लेकिन देश ने उनकी कला साधना को भी उतनी ही गंभीरता और सम्मान के साथ स्वीकार किया।

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नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
अनिल कुमार रस्तोगी की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यक्ति की प्रतिभा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होती। यदि जुनून और समर्पण हो तो विज्ञान और कला जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में भी उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।

उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने पेशे के साथ-साथ अपनी रचनात्मक रुचियों को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।

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सम्मान केवल व्यक्ति का नहीं, लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का भी
पद्मश्री सम्मान केवल अनिल कुमार रस्तोगी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और रंगमंचीय विरासत का भी सम्मान माना जा रहा है। विज्ञान और कला के बीच पुल बनाने वाले इस व्यक्तित्व ने साबित कर दिया है कि ज्ञान और सृजनशीलता की कोई सीमाएं नहीं होतीं।

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