
UP में किराए के मकान में रहते हैं तो पढ़ लें ये खबर, योगी सरकार ने बदले किरायेदारी के नियम
Property News: किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए राहत की खबर, 10 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर अब 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क; सरकार ने प्रक्रिया को बनाया सरल
Lucknow: उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान या गोदाम किराये पर लेने और देने वालों के लिए योगी सरकार ने किरायेदारी व्यवस्था को आसान और किफायती बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 10 साल तक की अवधि वाले किरायेदारी/पट्टा विलेखों के स्टांप शुल्क और पंजीयन फीस की व्यवस्था को सरल करने का निर्णय लिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अब निर्धारित सालाना किराये के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा। इससे किरायानामा तैयार कराकर उसका पंजीयन कराने वाले लोगों को पहले की तुलना में प्रक्रिया अधिक सरल होने की उम्मीद है।
सालाना किराये के हिसाब से तय होगा शुल्क
स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल के मुताबिक, पहले मकान, दुकान या गोदाम को किराये पर देने अथवा लेने के दौरान स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर की जाती थी। इसके चलते किरायानामा तैयार कराने और उसका पंजीयन कराने में लोगों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता था।
अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए निर्धारित शुल्क की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के अनुसार:
- 2 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर 1,000 रुपये शुल्क
- 6 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर 3,000 रुपये शुल्क
- 10 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क
तय किया गया है।
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मकान-दुकान किराये पर लेने वालों को राहत
सरकार के इस फैसले का असर उन लोगों पर पड़ेगा जो मकान, दुकान, कार्यालय या गोदाम किराये पर लेते या देते हैं। निर्धारित शुल्क व्यवस्था से किरायेदारी से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।
खास तौर पर लंबे समय के किरायेदारी या पट्टा विलेख कराने वाले लोगों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य किरायेदारी व्यवस्था में अनावश्यक जटिलताओं को कम करना और पंजीयन प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना है।
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10 साल तक की किरायेदारी पर लागू होगी व्यवस्था
कैबिनेट के फैसले में 10 वर्ष तक की अवधि वाले किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क एवं पंजीयन फीस में छूट की व्यवस्था को संशोधित किया गया है। सरकार ने इसके तहत शुल्क व्यवस्था को सरल और किफायती बनाने का फैसला लिया है।
हालांकि, किरायेदारों और मकान मालिकों को नए शुल्क की वास्तविक देयता अपने किरायानामे की अवधि और वार्षिक किराये के अनुसार सुनिश्चित करनी होगी।
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