पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये की बढ़ोतरी सिर्फ ट्रेलर? आगे और महंगा हो सकता है ईंधन…

Petrol, diesel price hike: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 15 मई से लागू हुए नए रेट्स के बाद कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी अंतिम नहीं भी हो सकती और आने वाले दिनों में तेल कंपनियां फिर से दाम बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।

आखिर क्यों बढ़ाए गए दाम?
तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन पर दबाव को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया है। पिछले कुछ हफ्तों में वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा होता है, तो घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना लगभग तय माना जाता है।

3 रुपये ही क्यों बढ़ाए गए?
हालांकि कई रिपोर्ट्स में 5 से 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन फिलहाल तेल कंपनियों ने केवल 3 रुपये का इजाफा किया है। जानकारों का मानना है कि कंपनियों ने एक साथ बड़ा झटका देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

विश्लेषकों के मुताबिक यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले हफ्तों में फिर कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। यही वजह है कि बाजार में यह चर्चा तेज है कि “3 रुपये तो सिर्फ शुरुआत है।”

पश्चिम एशिया संकट का सीधा असर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे ने तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसे में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ेगा। यही कारण है कि तेल कंपनियां फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में दिखाई दे रही हैं।

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आम आदमी पर बढ़ेगा असर
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थ, सब्जियां, दूध और रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों ने पहले ही किराया बढ़ाने के संकेत देने शुरू कर दिए हैं।

मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि पहले से बढ़ी महंगाई के बीच अब ईंधन का खर्च भी बढ़ गया है।

सरकार क्या कर सकती है?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती करती है, तो आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और राजकोषीय दबाव को देखते हुए फिलहाल ऐसा तुरंत होता नहीं दिख रहा।

सरकार की ओर से लोगों से ईंधन बचत, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की अपील की जा रही है। कई राज्यों में ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं पर भी काम हो रहा है।

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क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का साफ कहना है कि आने वाले दिनों में सबकुछ अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करेगा। यदि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो फिलहाल राहत मिल सकती है। लेकिन अगर पश्चिम एशिया का संकट गहराता है या सप्लाई प्रभावित होती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

इतना तय माना जा रहा है कि देश में ईंधन महंगाई का दौर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और तेल कंपनियों की अगली चाल पर सबकी नजर बनी हुई है।

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