
BRICS सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे व्लादिमीर पुतिन, PM मोदी से आज ही करेंगे मुलाकात
BRICS Summit 2026:18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार सुबह नई दिल्ली पहुंच गए हैं। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद यह पुतिन का भारत में पहला बड़ा बहुपक्षीय सम्मेलन दौरा है।
राजधानी में होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन (12-13 सितंबर) की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है।
व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच होने वाली यह बैठक द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती के लिहाज से बेहद अहम है। इस वार्ता के मुख्य एजेंडे में भारत और रूस के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को गति देना, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट्स और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन (Joint Production) को बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा, दोनों देश पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को और सुगम बनाने पर भी बात करेंगे।
#BREAKING | Russian President Vladimir Putin arrives in New Delhi to participate in the 18th BRICS Summit.
Minister of State for External Affairs, Kirti Vardhan Singh receives President Putin at the airport.
During his visit, President Putin is scheduled to hold talks with… pic.twitter.com/lsnO9ouINf
— DD News (@DDNewslive) September 10, 2026
मेक इन इंडिया पर फोकस
रक्षा क्षेत्र में इस वार्ता का सबसे बड़ा आकर्षण रूस के 5वीं पीढ़ी के सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट ‘Su-57’ की भारत को संभावित बिक्री और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश मानी जा रही है। क्रेमलिन ने संकेत दिया है कि रूस भारत को महज एक खरीदार के रूप में नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में देखता है। इसके साथ ही ब्रह्मोस मिसाइल के अपग्रेडेड वर्जन और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में IL-114 टर्बोप्रॉप व सुखोई सुपरजेट 100 जैसे विमानों के भारत में निर्माण को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है।
पुतिन का यह दिल्ली दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संकट, होर्मुज स्ट्रैट की नाकेबंदी और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव पड़ा है। भारत मंडपम में आयोजित होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले होने वाली इस मोदी-पुतिन वार्ता से ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ का मसौदा तैयार करने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में ऊर्जा आयात, दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) के क्षेत्र में साझेदारी और वैश्विक खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस सहमति बन सकती है।





