हिंदू बहुल रहने तक ही भारत लोकतांत्रिक, जहां हिंदू घटा वहीं भारत विरोध: होसबाले

dattatreya hosabale

नोएडा (उप्र)। हिंदू बहुल रहने तक ही भारत लोकतांत्रिक रहेगा। विभाजन के साक्षी रहे लोग राष्ट्रीयता के लिए मार्गदर्शन और पाथेय हैं। यह बात नोएडा के भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर में जागृति प्रकाशन की ओर से आयोजित पुस्तक ‘विभाजनकालीन भारत के साक्षी’ के विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कही।

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा देश के विभाजन के साक्षी रहे लोगों के संस्मरण व चित्र को एकत्र करके तथ्यों के साथ संजोने का कार्य पुस्तक खंड तीन व चार में किया गया है। उस समय हिंदू समाज के साथ हुए अत्याचार के साक्षी रहे 350 लोगों का साक्षात्कार कर विस्तृत वर्णन सभी खंड में दिया गया है।

उन्होंने कहा पुस्तक विभाजन के दर्द को समझने में संदर्भ का काम करेगी। पुस्तक में इतिहास में अंधकार में रहे भाग पर प्रकाश डाला गया है। भारत एक संस्कृति एक राष्ट्र और एक जन है।

उन्होंने कहा 16 अगस्त 1946 के बाद मुस्लिम लीग की तरफ से शुरू हुए डायरेक्ट एक्शन ने दिखाया कि मानवता कितनी नीचे जा सकती है। आज भी विश्व के कई भागों में कट्टरपंथी, जिहादी मानसिकता हिंसात्मक कार्य करने के लिए कार्य कर रही हैं, इसलिए इतिहास को समझकर आगे कार्य करने की जरूरत है।

जहां हिंदू घटते हैं, वहीं भारत विरोधी मानसिकता

होसबाले ने कहा कि पुस्तक ने राष्ट्र भक्ति की मिसाल को युवाओं तक पहुंचाया है। इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। विभाजन के साक्षी रहे परिवारों का देश को कृतज्ञ रहना चाहिए व आगे आने वाली पीढ़ियों को भयावह सत्य के बारे में बताना चाहिए।

भारत में भी पाकिस्तान परस्त मानसिकता बनाने का कार्य हुआ है। जहां हिंदू घट जाता है, वहां भारत विरोधी मानसिकता जन्म लेती है। भारत की राष्ट्रीयता युगों-युगों से चल रही परंपरा से आती है। अखंड भारत का संकल्प हमने संजोया है। मैं भविष्य देख रहा हूं, जब भारत अखंड होगा।

विभाजन कभी न मिटने वाली वेदना

पुस्तक के लेखक कृष्णा नंद सागर ने बताया कि खंड एक व दो के विमोचन पर आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा था कि मातृभूमि का विभाजन कभी न मिटने वाली वेदना है।

विभाजन के समय हुए अत्याचार मुस्लिम लीग ने नहीं किया, बल्कि मुस्लिम समाज ने किया था। मुस्लिम लीग ने उसका नेतृत्व किया था। विभाजन के समय उप्र, मप्र, बिहार व बंगाल सहित अन्य राज्यों के मुस्लिमों की भूमिका के बारे में वर्णन किया गया है।

विभाजन के साक्षी रहे लोगों का किया गया सम्मान

इस दौरान विभाजन के साक्षी रहे दिलजीत वधावन, राजकुमार चावला, अमरनाथ आनंद, कर्नल कृष्ण पाल शर्मा, राम मूर्ति बब्बर, गोपेश गोस्वामी, चरण सिंह, परमहंस लाल मेहता, मदन लाल खन्ना, कर्नल मोहकम सिंह, रामशरण गौड़, हरिशनंद्र, रघुवीर सिंह सैनी, स्वदेश पाल सच्चिदानंद शर्मा, कमांडर कैलाश प्रसाद व रमेश को सम्मानित किया गया।

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