‘बिल सामने आने दीजिए, फिर होगा फैसला’… परिसीमन पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान

Delimitation Bill: देश में प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने स्पष्ट किया है कि पार्टी ने अभी तक इस मुद्दे पर अपना अंतिम रुख तय नहीं किया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि परिसीमन से संबंधित विधेयक अभी सामने नहीं आया है, इसलिए फिलहाल इस पर कोई औपचारिक चर्चा या फैसला नहीं हुआ है।

सुप्रिया सुले ने संकेत दिया कि यदि प्रस्तावित विधेयक में 50 फीसदी कोटा से जुड़ी व्यवस्था शामिल की जाती है, तो पार्टी उस पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि विधेयक का वास्तविक स्वरूप सामने आने के बाद ही विपक्षी गठबंधन INDIA के दल इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

बिल आने के बाद तय होगा रुख
परिसीमन बिल को लेकर पूछे गए सवालों पर सुप्रिया सुले ने कहा कि अभी केवल चर्चाएं और अटकलें चल रही हैं। उन्होंने साफ किया कि जब तक विधेयक संसद में पेश नहीं होता, तब तक किसी भी राजनीतिक दल के लिए अंतिम रुख तय करना जल्दबाजी होगी।

उन्होंने कहा कि बिल सामने आने के बाद उसके सभी प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद INDIA गठबंधन के घटक दल आपस में चर्चा कर संयुक्त रूप से आगे की रणनीति तय करेंगे।

50 फीसदी कोटा पर पार्टी की नजर
NCP-SP की ओर से यह संकेत दिया गया है कि परिसीमन बिल में यदि 50 फीसदी कोटा से जुड़ी मांग या प्रावधान को शामिल किया जाता है, तो पार्टी उसके आधार पर अपने रुख पर विचार कर सकती है। सुप्रिया सुले के बयान के बाद इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की संभावित रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, परिसीमन का मुद्दा केवल लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर राज्यों के प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। ऐसे में विपक्षी दल विधेयक के हर प्रावधान का बारीकी से अध्ययन कर सकते हैं।

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INDIA गठबंधन में होगी विस्तृत चर्चा
सुप्रिया सुले ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर फैसला अकेले उनकी पार्टी नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि विधेयक सामने आने के बाद INDIA गठबंधन के दलों के बीच विस्तार से विचार-विमर्श होगा।

विपक्षी गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिसीमन से जुड़े संभावित राजनीतिक और संवैधानिक प्रभावों को लेकर साझा रणनीति तैयार करना होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू होने की संभावना है।

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परिसीमन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
परिसीमन को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है। विपक्षी दलों की ओर से आशंका जताई जाती रही है कि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों के पुनर्विन्यास से राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव आ सकता है।

हालांकि, अभी तक प्रस्तावित परिसीमन बिल का अंतिम प्रारूप सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल आधिकारिक विधेयक का इंतजार कर रहे हैं। सुप्रिया सुले के बयान से यह साफ हो गया है कि NCP-SP फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर है और 50 फीसदी कोटा के प्रावधान को पार्टी के संभावित रुख में अहम माना जा रहा है।

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