
Lucknow: ध्वस्तीकरण आदेश से मौत के मंजर तक, अलीगंज अग्निकांड में बड़ा खुलासा
Lucknow Coaching Fire News: अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद अब भवन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। सामने आया है कि जिस इमारत में यह भीषण हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन महज दो महीने के भीतर ही उसे निरस्त कर दिया गया था। अब दो सदस्यीय एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है।
एसआईटी ने मौके पर शुरू की जांच
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात और एडीजी जोन प्रवीण कुमार की अगुवाई वाली एसआईटी मंगलवार को घटनास्थल पहुंची। टीम हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों और विभिन्न विभागों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
बिजली कनेक्शन और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि भवन को विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन करने के बाद ही बिजली कनेक्शन दिया गया था या नहीं। यदि आवश्यक परीक्षण और अनुमतियों के बिना कनेक्शन जारी हुआ है तो बिजली विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा जारी किसी स्वीकृति की भी समीक्षा की जा रही है।
1980 में हुआ था आवंटन
अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन 11 जुलाई 1980 को विजय कुमार के नाम हुआ था। बाद में यह भवन 2013 में वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेचा गया। वर्ष 2014 में एलडीए ने नामांतरण पूरा किया और आवासीय उपयोग के लिए मानचित्र स्वीकृत किया था।
ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर बढ़े सवाल
भवन में अनधिकृत निर्माण पाए जाने पर एलडीए ने वर्ष 2016 में मुकदमा दर्ज किया था। जांच के बाद 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया, लेकिन 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब यह फैसला भी जांच और सवालों के केंद्र में आ गया है।
एलडीए ने बनाई पांच सदस्यीय जांच समिति
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने घटना की अलग से जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। ज्ञानेंद्र वर्मा के नेतृत्व में गठित टीम में के.के. गौतम, मानवेंद्र सिंह, मनोज सागर और रविनंदन सिंह शामिल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एलडीए के एई और जेई को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
15 लोगों की गई जान, कई घायल
सोमवार को अलीगंज स्थित इमारत की तीसरी मंजिल पर बने गेमिंग जोन और सॉफ्टवेयर ऑफिस में भीषण आग लग गई थी। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं और केजीएमयू में उनका उपचार चल रहा है। आग से बचने के लिए कई लोगों ने इमारत से छलांग भी लगाई थी।
चार आरोपी गिरफ्तार
मामले में थाना अलीगंज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब तक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषॉक कृष्णा जायसवाल और सुरेश कुमार साहू समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ने जताया शोक
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री Yogi Adityanath अपना कार्यक्रम छोड़कर लखनऊ पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
मृतकों की सूची
अनुछा राय, अनामिका सामंत, सौमाल्या बेरा, सैयम विज, सूरज सिंह, सागर पंत, सुखमनी सिंह, ज्योति, मोहम्मद अम्मार, नीलेश कुमार, जैनिल चक्रवर्ती, अब्दुल रहमान, आदित्य श्रीवास्तव, शाहजान सिद्दीकी और भविष्य शर्मा।





