
Hormuz पर बड़ा ब्रेकथ्रू! भारत समेत एशिया के लिए खुल सकती है राहत की राह…
Hormuz Agreement over Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच लंबे समय से वैश्विक व्यापार के लिए चिंता का कारण बने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान और ओमान के बीच इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर चल रही बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। यदि दोनों देशों के बीच सहमति बन जाती है तो भारत समेत कई एशियाई देशों के लिए कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकती है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और अब यह अंतिम चरण में है। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, उन्होंने कैबिनेट बैठक में इस प्रगति की जानकारी दी।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर होने वाले समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसके चलते तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर भी दबाव देखने को मिला।
ओमान बना मध्यस्थ
इस पूरे विवाद में ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। बताया जा रहा है कि ओमान ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिस पर ईरान सकारात्मक रुख दिखा रहा है। यदि इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति बनती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद बढ़ जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल खाड़ी देशों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देशों के लिए भी राहत की खबर हो सकती है।
यह भी पढ़ें…
Iran का ‘ऑयल कार्ड’ कितना खतरनाक? एक फैसले से हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था…
भारत को कैसे होगा फायदा?
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है तो भारत को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है—
- कच्चे तेल और एलपीजी टैंकरों की आपूर्ति अधिक सुचारु होगी।
- शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में कमी आने की संभावना बनेगी।
- ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितता घट सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना बढ़ेगी।
हालांकि, तेल की कीमतें कई वैश्विक कारकों से प्रभावित होती हैं, इसलिए केवल इस घटनाक्रम के आधार पर कीमतों में कमी की गारंटी नहीं दी जा सकती।
यह भी पढ़ें…
क्या भारत से करेंगी बांग्लादेश की राजनीति? शेख हसीना मामले पर केंद्र ने साफ की स्थिति…
ट्रंप के हमले टलने के बाद सकारात्मक संकेत
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई फिलहाल टलने के बाद क्षेत्र में तनाव कुछ कम हुआ है। ऐसे समय में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच आगे बढ़ती बातचीत को एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता कब होता है और उसके बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर व्यापारिक गतिविधियां किस गति से सामान्य होती हैं। यदि बातचीत सफल रहती है तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत की बड़ी खबर साबित हो सकती है।
यह भी पढ़ें…





