
रोबोटिक सर्जरी का कमाल… घुटना-कूल्हा रिप्लेसमेंट से मरीजों को मिला दर्द से स्थायी राहत
Joint Replacement Surgery: आधुनिक चिकित्सा तकनीक के दौर में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ने लाखों मरीजों को नई जिंदगी दी है। घुटनों, कूल्हों और कंधों के गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीज अब सामान्य जीवन जी पा रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को मेदांता हॉस्पिटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई मरीजों ने अपनी सफल सर्जरी के अनुभव साझा किए। ऑर्थोपेडिक्स एंड रोबोटिक रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. सौरव शुक्ला के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में बताया गया कि कैसे आधुनिक रोबोटिक तकनीक ने जॉइंट सर्जरी को अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बना दिया है।
दर्द से राहत और सामान्य जीवन की वापसी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल कई मरीज ऐसे थे जो पहले ठीक से चल भी नहीं पाते थे, लेकिन सर्जरी के बाद अब मॉर्निंग वॉक, सीढ़ियां चढ़ना और रोजमर्रा के काम आसानी से कर पा रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ घुटनों की कार्टिलेज घिसने लगती है, जिससे दर्द, सूजन और चलने में दिक्कत शुरू हो जाती है। शुरुआती दौर में दवाइयों, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है, लेकिन गंभीर स्थिति में जॉइंट रिप्लेसमेंट ही सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है।

रोबोटिक तकनीक से बढ़ी सर्जरी की सटीकता
डॉ. सौरव शुक्ला के अनुसार, पहले लोग जॉइंट रिप्लेसमेंट को लेकर डरते थे, लेकिन अब रोबोटिक तकनीक के कारण सर्जरी बेहद सटीक हो गई है। इसमें छोटा चीरा लगता है, खून कम बहता है, अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और कई मरीज सर्जरी के दिन ही चलना शुरू कर देते हैं। सही देखभाल के साथ नी रिप्लेसमेंट 20 साल तक आराम से चल सकता है।
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मरीजों की सफलता की कहानियां
71 वर्षीय राजेश कुमार, जो पहले दर्द के कारण चल नहीं पाते थे, दोनों घुटनों के रिप्लेसमेंट के बाद अब सामान्य जीवन जी रहे हैं।
67 वर्षीय वैज्ञानिक डॉ. अंजू पुरी लेफ्ट नी रिप्लेसमेंट के बाद पूरी तरह सक्रिय हैं।
77 वर्षीय शिक्षक राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी दोनों घुटनों की सर्जरी के बाद बिना सहारे चल पा रहे हैं।
इसके अलावा 26 वर्षीय अली नवाज खान, जिन्हें पहले ट्रॉमा के बाद संक्रमण और इम्प्लांट फेल होने की समस्या हुई थी, उनका सफल हिप रिप्लेसमेंट किया गया और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
69 वर्षीय मिथिलेश कुमारी का घुटनों के बाद कंधे का भी सफल ऑपरेशन हुआ।
वहीं अभिषेक सिंह तोमर का एसीएल रिकंस्ट्रक्शन और मल्टी ट्रॉमा सर्जरी के बाद सफल इलाज किया गया।
महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है समस्या
डॉक्टरों के मुताबिक घुटनों की समस्या महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। इसकी वजह हार्मोनल बदलाव, कैल्शियम की कमी और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
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समय पर इलाज है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, सही सलाह और आधुनिक तकनीक की मदद से अब जॉइंट से जुड़ी जटिल समस्याओं का सफल इलाज संभव है। आज रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी मरीजों को दर्दमुक्त, सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन जीने में मदद कर रही है।
बदल रही है ऑर्थोपेडिक इलाज की तस्वीर
डॉक्टरों का मानना है कि आने वाले समय में रोबोटिक तकनीक ऑर्थोपेडिक सर्जरी का भविष्य तय करेगी। इससे न केवल सर्जरी के परिणाम बेहतर होंगे बल्कि मरीजों का रिकवरी टाइम भी कम होगा और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।
अगर चाहें तो मैं इसका और ज्यादा ग्राउंड रिपोर्ट स्टाइल, टीवी न्यूज़ पैकेज स्टाइल, या मानवीय कहानी (human angle) वाला वर्जन भी बना सकता हूँ।
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