जातिवाद छोड़ो…, हम आरक्षण छोड़ देंगे: रामदास आठवले

Reservation News: रामदास आठवले ने आरक्षण को लेकर रखी बड़ी शर्त, बोले- जब तक जातिवाद और भेदभाव खत्म नहीं होता, तब तक आरक्षण जरूरी

Delhi: आरक्षण को लेकर देश में जारी बहस के बीच केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के प्रमुख रामदास आठवले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर देश से जातिवाद और जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाए, तो वह आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं। हालांकि, जब तक जातिगत भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।

‘जातिवाद खत्म हो तो आरक्षण छोड़ देंगे’
रामदास आठवले बुधवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे थे। यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे देश में आरक्षण को लेकर चल रही बहस और इसे खत्म करने की मांगों पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि आरक्षण का प्रावधान कमजोर और वंचित वर्गों को अवसर देने के लिए किया गया है।

आठवले ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जब जातिवाद खत्म हो जाएगा, हम आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं।” उनका कहना था कि आरक्षण का विरोध करना उचित नहीं है, क्योंकि देश में अभी भी जातिगत भेदभाव और अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं।

जब तक भेदभाव खत्म नहीं, तब तक आरक्षण जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत अस्पृश्यता को खत्म किया गया था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि समाज से जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो गया है। उनके मुताबिक, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं आज भी होती हैं।

इसी आधार पर उन्होंने कहा कि जातिवाद और जातिगत भेदभाव के पूरी तरह खत्म होने तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने आरक्षण को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए इसे कमजोर वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देने वाली व्यवस्था बताया।

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कब लागू हुआ आरक्षण?
आठवले ने आरक्षण के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण संविधान लागू होने के समय 1950 से व्यवस्था में है। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के लिए आरक्षण 1990-91 में तत्कालीन वीपी सिंह सरकार के दौरान लागू किया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों यानी EWS के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है।

जातीय जनगणना का भी किया समर्थन
रायपुर दौरे के दौरान आठवले ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना की मांग को स्वीकार किया है। उनके मुताबिक, इससे देश में विभिन्न सामाजिक वर्गों की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

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क्या है आठवले की शर्त?
रामदास आठवले के बयान का सीधा मतलब है कि आरक्षण खत्म करने की स्थिति तभी बन सकती है, जब देश से जातिवाद और जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाए। यानी उन्होंने आरक्षण छोड़ने की बात कही है, लेकिन इसे जातिवाद खत्म होने की शर्त से जोड़ा है। फिलहाल उनका कहना है कि जब तक समाज में जातिगत भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी।

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