पाकिस्तान को पालने का अंजाम अच्छा नहीं…, राजनाथ सिंह ने अमेरिका को दी चेतावनी

Rajnath Singh: भारत ने अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए जा रहे सैन्य समर्थन को लेकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। फिलीपींस के सेबू में आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने अमेरिकी रक्षा प्रमुख (Secretary of War) पीट हेगसेथ के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

इस अहम मुलाकात के दौरान रक्षा मंत्री ने अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के लिए मंजूर किए गए एफ-16 (F-16) विमानों के रखरखाव और आधुनिकीकरण पैकेज पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

अमेरिका के F-16 पैकेज पर भारत की आपत्ति

हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए करोड़ों डॉलर के एक नए पैकेज को मंजूरी दी है, जिसके जरिए पाकिस्तान अपने पुराने पड़ चुके करीब 70 एफ-16 लड़ाकू विमानों को अपग्रेड कर उन्हें वर्ष 2040 तक संचालित करने योग्य बनाएगा। इन विमानों की ऑपरेशनल मियाद मूल रूप से समाप्त होने की कगार पर थी।

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी पक्ष के सामने स्पष्ट रूप से यह मुद्दा उठाया कि इस प्रकार के सैन्य और तकनीकी पैकेज का इस्तेमाल क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ने और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले तत्वों द्वारा भारत के खिलाफ किया जा सकता है। भारत ने पहले भी इस बात पर जोर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का दावा करने वाले देशों को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जो परोक्ष रूप से सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित करते हैं।

संवेदनशील तकनीक के दुरुपयोग की आशंका

भारतीय पक्ष की ओर से यह भी चिंता जताई गई कि अमेरिका जैसी उन्नत सैन्य तकनीक और सॉफ्टवेयर सहायता का सामरिक रूप से संवेदनशील माहौल में गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसके अलावा, पाकिस्तान के चीन जैसे देशों के साथ गहरे सैन्य और सामरिक गठजोड़ को देखते हुए इस बात का भी जोखिम रहता है कि इस तरह की आधुनिक तकनीक और रक्षा प्रणालियों की संवेदनशीलता अन्य देशों तक पहुंच सकती है।

भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी पर चर्चा

तमाम असहमतियों और आपत्तियों के बावजूद, दोनों देशों के शीर्ष रक्षा नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और पिछले समझौतों की प्रगति की समीक्षा की। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख और लड़ाई में समर्थन दोहराया। बैठक में हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त रखने तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

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