IPS बुशरा बानो के ट्रांसफर पर छिड़ा सियासी घमासान

अस्सलाम वालेकुम और इंशाअल्लाह पर था विवाद

पश्चिम बंगाल कैडर की आईपीएस अधिकारी डॉ. बुशरा बानो के अचानक हुए तबादले ने तूल पकड़ लिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बनाए गए एक प्रेरक वीडियो में ‘अस्सलाम वालेकुम’, ‘इंशाअल्लाह’ और ‘जजाकल्लाह’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल के बाद उपजे विवाद के बीच राज्य सरकार ने उनका ट्रांसफर कर दिया है। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। डॉ. बुशरा बानो, जो पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर में एडिशनल एसपी (ASP) के पद पर तैनात थीं, उन्हें अब स्टेट आर्म्ड पुलिस (SAP) की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट बनाकर भेजा गया है। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का नया एडिशनल एसपी नियुक्त किया गया है।

13 सितंबर को पोस्ट किए गए एक वीडियो से हुई, जिसमें आईपीएस बुशरा बानो वर्दी में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC ) के अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन और हौसलाअफजाई कर रही थीं।
वीडियो की शुरुआत उन्होंने ‘अस्सलाम वालेकुम’ से की और बातचीत के दौरान ‘इंशाअल्लाह’ व अंत में ‘जजाकल्लाह’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया।

संगठन की शिकायत ‘हिंदू लीगल फंड’ नामक एक्स ( पूर्व में ट्विटर ) हैंडल ने इस वीडियो को साझा करते हुए राज्य के गृह सचिव से शिकायत करने का दावा किया। संगठन ने तर्क दिया कि वर्दीधारी सेवारत अधिकारी को सार्वजनिक संवाद में निष्पक्षता बरतते हुए ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम’ जैसे राष्ट्रीय उद्बोधनों का प्रयोग करना चाहिए।
भारी ऑनलाइन ट्रोलिंग और विवाद के बाद आईपीएस अधिकारी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से यह वीडियो हटा लिया था।

आईपीएस अधिकारी के तबादले के बाद कई प्रमुख नेताओं ने खुलकर उनका समर्थन किया और सरकार के रुख की आलोचना की:
मोहम्मद अजहरुद्दीन (पूर्व क्रिकेटर व सांसद): अजहरुद्दीन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह बेहद चिंताजनक है कि केवल ‘अस्सलाम वालेकुम’ और ‘इंशाल्लाह’ कहने पर एक लोक सेवक को निशाना बनाया जा रहा है। जब सामान्य अभिवादन कार्रवाई का आधार बन जाए, तो सवाल उठता है कि हम अल्पसंख्यकों को क्या संदेश दे रहे हैं? भारत की वास्तविक ताकत उसकी विविधता में है, पहचान को नियंत्रित करने में नहीं।

महुआ मोइत्रा (टीएमसी सांसद) ने तबादला आदेश की प्रति साझा करते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम महिला अधिकारी को केवल अपनी भाषा में अभिवादन करने के लिए किनारे कर दिया गया, जो नफरती माहौल को बढ़ावा देने जैसा है। उन्होंने कहा, “बुशरा, हम आपके साथ खड़े हैं।
इमरान प्रतापगढ़ी (कांग्रेस सांसद)ने कहा कि सोशल मीडिया पर महिला आईपीएस की ट्रोलिंग करवाए जाने के बाद राज्य सरकार को उनके साथ खड़े होना चाहिए था, लेकिन इसके उलट अगले ही दिन उनका ट्रांसफर कर दिया गया।
प्रशासनिक स्तर पर इसे भले ही नियमित फेरबदल बताया जा रहा हो, लेकिन टाइमिंग और विवाद की पृष्ठभूमि ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति, विविधता और प्रशासनिक आचरण की बहस में तब्दील कर दिया है।

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