Lucknow में पोस्टर पॉलिटिक्स… सपा शासन को बताया ‘ल्यारी राज’

UP Politics: राजधानी लखनऊ में एक बार फिर सियासी पोस्टर वार ने माहौल गर्म कर दिया है। शहर के वीवीआईपी चौराहे के पास लगाए गए एक पोस्टर ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस पोस्टर के जरिए समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर कानून-व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला गया है।

पोस्टर में सपा शासन पर गंभीर आरोप
पोस्टर में 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल को निशाने पर लिया गया है। इसमें ‘ल्यारी राज’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए दावा किया गया है कि उस दौरान उत्तर प्रदेश की स्थिति पाकिस्तान के कराची के लियारी इलाके जैसी हो गई थी, जो अपराध और गैंगवार के लिए कुख्यात रहा है।

पोस्टर में हत्या, लूट, डकैती और अन्य आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कई पुराने अखबारों की कटिंग भी लगाई गई हैं, ताकि आरोपों को मजबूत तरीके से पेश किया जा सके।

समाजसेवी ने दी अपनी प्रतिक्रिया
यह पोस्टर समाजसेवी देवेंद्र तिवारी द्वारा लगाए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि यह पोस्टर जनता को सपा सरकार के दौरान की कानून-व्यवस्था की स्थिति याद दिलाने के लिए लगाया गया है। उनके अनुसार, उस समय आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस करती थी और अपराधियों के हौसले बुलंद थे।

सियासी माहौल हुआ गर्म
इस पोस्टर के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सपा समर्थकों ने इसे एकतरफा और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है, जबकि विरोधी दल इसे सपा के शासनकाल की “सच्चाई” बता रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए इस तरह के पोस्टर वार और तेज हो सकते हैं, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और भी आक्रामक हो सकती है।

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प्रशासन की भूमिका पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजधानी के वीवीआईपी इलाके में इस तरह के विवादित पोस्टर कैसे लग गए। आमतौर पर ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी कड़ी रहती है, इसके बावजूद पोस्टर का लगना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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पहले भी हो चुके हैं पोस्टर विवाद
लखनऊ में पोस्टर के जरिए राजनीतिक संदेश देने की यह कोई नई घटना नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ पोस्टर लगाकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या यह पोस्टर हटाए जाते हैं या फिर सियासी बयानबाजी का दौर और तेज होता है। फिलहाल, इस पोस्टर ने राजधानी की राजनीति में एक बार फिर हलचल जरूर पैदा कर दी है।

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