
प्रवासी भारतीय दिवस: विदेश में बसे भारतीयों के योगदान से भारत मजबूत
Pravasi Bharatiya Diwas: भारत पिछले कई वर्षों से विश्व में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बना हुआ है। प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजा गया रेमिटेंस न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करता है, बल्कि अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों के लिए आधार भी प्रदान करता है। जून 2025 तक भारतीय बैंकों में एनआरआई जमा राशि लगभग 3.6 बिलियन डॉलर रही, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में रेमिटेंस 135.46 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष से लगभग 14 प्रतिशत अधिक है।
इतिहास और प्रवासी भारतीय दिवस
9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। इस ऐतिहासिक वापसी की स्मृति में 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। यह दिन गांधीजी की विरासत और विदेशों में बसे भारतीयों के योगदान का सम्मान करता है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय वाला देश है। 1990 में प्रवासी भारतीयों की संख्या लगभग 66 लाख थी, जबकि आज विश्वभर में लगभग 3.5 करोड़ भारतीय रहते हैं। इनमें 1.6 करोड़ अप्रवासी भारतीय और 1.95 करोड़ विदेशी नागरिकता प्राप्त भारतीय मूल के लोग शामिल हैं। अमेरिका में 55 लाख, संयुक्त अरब अमीरात में 36 लाख और मलेशिया में 28 लाख भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं।
आर्थिक और सामाजिक योगदान
प्रवासी भारतीयों ने विज्ञान और शिक्षा में वैश्विक नवाचार को बढ़ावा दिया—जैसे कल्पना चावला, सत्य नडेला और सुंदर पिचाई। राजनीति में ऋषि सुनक और अनिरुद्ध जगन्नाथ, व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में इंदिरा नूयी और मीरा नायर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कला और संस्कृति के क्षेत्र में रविशंकर और जुबिन मेहता जैसे कलाकार भारत की वैश्विक छवि को सशक्त कर रहे हैं।
संकट के समय प्रवासी भारतीयों की भूमिका और भी स्पष्ट होती है। कोविड-19 के दौरान रेमिटेंस जीवनरेखा बनी, जबकि 2018 की केरल बाढ़ में खाड़ी देशों से व्यापक आर्थिक और राहत सहायता उपलब्ध कराई गई। मई 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के समय भी एनआरआई समुदाय ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया।
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सरकारी पहल और सुविधाएँ
भारत सरकार और रिज़र्व बैंक ने प्रवासी भारतीयों को विकास यात्रा से जोड़ने के लिए कई पहलें की हैं।
- ओसीआई कार्ड: वीज़ा-मुक्त यात्रा, संपत्ति स्वामित्व और व्यापारिक भागीदारी आसान बनाता है।
- एनआरई/एनआरओ खाते और एफसीएनआर जमा: सुरक्षित निवेश और कर रियायतें उपलब्ध कराते हैं।
- डिजिटल भारत: यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार, विदेशी मोबाइल नंबरों के माध्यम से भुगतान और लेन-देन संभव हुआ।
- एफईएमए नियम: निवेश, व्यापार और रेमिटेंस से जुड़े नियम सरल और पारदर्शी बनाए गए।
- कर व्यवस्था: एनआरआई की आय पर भारत में केवल वही कर लागू होता है जो भारतीय स्रोत से उत्पन्न हुई हो।
साथ ही, दोहरी कराधान से बचाव समझौतों और हेल्पलाइन, पासपोर्ट सेवाओं व कांसुलर सहायता के माध्यम से प्रवासी भारतीयों को विदेश में भी सुरक्षा और सहयोग मिलता है।
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भविष्य की भूमिका और महत्व
प्रवासी भारतीयों की अपेक्षाएं हैं:
- निवेश प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सरलता
- दोहरी नागरिकता पर संवाद
- संपत्ति, कर और उत्तराधिकार कानून स्पष्ट
- बच्चों के लिए शिक्षा, संस्कृति और भाषा के माध्यम से भारत से जुड़ाव
वे अपने अनुभव और संसाधनों के माध्यम से भारत की ब्रेन गेन और इनकम गेन में योगदान कर रहे हैं। उनका उद्यमिता और नवाचार आर्थिक शक्ति को सुदृढ़ करता है, जबकि संस्कृति, भाषा और मूल्यों का प्रसार भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर मजबूत करता है।
प्रवासी भारतीय दिवस हमें याद दिलाता है कि चाहे भारतीय कहीं भी हों, भारत वहां जीवित है—आर्थिक सामर्थ्य, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों के साथ।
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