धनखड़ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, विपक्ष लगा रहा पक्षपात का आरोप

कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी सांसदों ने जगदीप धनखड़ को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश करने का मन बनाया है। विपक्ष ने राज्यसभा में अध्यक्ष के रूप में उनके “पक्षपाती” व्यवहार के कारण यह कदम उठाने का फैसला किया है। धनखड़ देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर यानी उप राष्ट्रपति हैं। इसके साथ ही धनखड़ राज्यसभा के अध्यक्ष भी हैं। राज्यसभा में धनखड़ और समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन के बीच कई बार बहस हो चुकी है।

धनखड़ के खिलाफ क्यों है विपक्ष?
विपक्ष राज्यसभा में जगदीप धनखड़ के खिलाफ गोलबंदी कर रहा है। इसके लिए वह सभापति के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाने पर विचार कर रहा है। इसे कांग्रेस के नेता अजय माकन के बयान से भी समझा जा सकता है। अजय माकन ने कहा कि राज्यसभा एक ऐसा सदन है जो अन्य विधानसभाओं के लिए मापदंड निर्धारित करता है। उस सदन में सभापति को पक्षपातपूर्ण नहीं देखा जाना चाहिए।

अकेले कांग्रेस को ऐसा नहीं लगता है। सभी विपक्षी दलों को लगता है कि उनका व्यवहार एक पक्ष के प्रति पक्षपातपूर्ण है। महिला सांसदों और बाकी पुरुष सांसदों को लगता है कि उनकी आवाज दबाई जाती है, विपक्ष के नाते उन्हें अपनी बात कहने का मौका कम मिलता है। उनके किसी भी कहे पर धनखड़ तुरंत ऐक्शन ले लेते हैं वहीं सत्ता पक्ष से सवाल नहीं किया जाता है। मुख्यत: महिला सांसदों को लगता है कि उनसे धनखड़ अच्छे से बात नहीं करते।

विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पेश होगा प्रस्ताव
कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक ने कहा है कि धनखड़ का बर्ताव राज्यसभा में लगातार पक्षपातपूर्ण रहा है। विपक्ष का कहना है कि धनखड़ ने अपने पद का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की है। इस बीच, विपक्ष ने 87 सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ प्रस्ताव पेश करने की तैयारी की है। इस प्रस्ताव में धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से हटाने का सुझाव दिया गया है।

संविधान के अनुच्छेद 67(b) के तहत क्या होती है प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार, उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले प्रस्ताव का नोटिस देना अनिवार्य है। प्रस्ताव राज्यसभा में सभी सदस्यों की बहुमत से पारित होना चाहिए और फिर लोकसभा द्वारा भी इसे स्वीकृति मिलनी चाहिए। हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना कम है। हालांकि, यह विपक्ष की तरफ से एक संदेश देने की रणनीति है। इस बीच, विपक्ष ने केंद्र सरकार को इस प्रस्ताव के बारे में अनौपचारिक रूप से सूचित भी कर दिया है।

मानसून सत्र के बाद क्या होगा विपक्ष का अगला कदम
संसद का मानसून सत्र, जो 22 जुलाई को शुरू हुआ था। संसद सत्र खत्म हो चुका है। सत्र के समाप्ति के बावजूद विपक्ष अपनी रणनीति पर कायम है और धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। सत्र के समापन से पहले ही, विपक्ष ने उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की अपनी मंशा साफ तौर पर जाहिर कर दी थी। विपक्ष का मानना है किभले ही प्रस्ताव को मंजूरी मिले या ना मिले यह एक अहम राजनीतिक संदेश होगा।

धनखड़ के समर्थन में एनडीए
एनडीए दल के नेता विपक्ष से उलट जगदीप धनखड़ के साथ खड़े हैं। कल राज्यसभा में जेपी नड्डा ने अपनी सीट से उठकर धनखड़ के समर्थन में कई बातें कहीं। यही नहीं उन्होंने विपक्ष के रवैये से आहत होकर निंदा प्रस्ताव भी पेश किया। यह किसी के छुपा नहीं है कि जगदीप धनखड़ एनडीए के नेताओं के वोट से ही उपराष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठे हैं। विपक्ष तो मार्गरेट अल्वा को अपना उम्मीदवार बनाकर लाया था। एनडीए किसी भी हाल में नहीं चाहेगा कि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाकर धनखड़ की कुर्सी हिला दे।

एनडीए की तरफ से बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने कहा कि सदन में आज जो घटनाक्रम हुआ वो निंदनीय है और चिंताजनक है। ये प्रजातंत्र के मूल्यों का एक तरह से हनन है। मैं चाहूंगा कि ये सदन विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव को जरूर पारित करे। आज जो घटना घटी है और जिस तरह से विपक्ष का व्यवहार रहा है, वो बहुत ही असंसदीय, अमर्यादित और अनुशासनहीन रहा है। सत्ता पक्ष यह कोशिश करेगा कि यह साबित किया जाए दिखाया जाए कि विपक्ष ही गड़बड़ कर रहा है और सदन सही तरीक से न चलने के पीछे उनकी कोई साजिश है।

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