
गंगा की धारा रोकने की तैयारी? बांग्लादेश के पद्मा बैराज को लेकर उठे बड़े सवाल…
Padma Barrage: बांग्लादेश में प्रस्तावित पद्मा बैराज परियोजना को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों और जल वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman ने हाल ही में पद्मा नदी पर बैराज बनाने की घोषणा की, जिसके बाद इस परियोजना को लेकर बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बिना व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और क्षेत्रीय समन्वय के यह परियोजना आगे बढ़ाई गई, तो इससे पर्यावरणीय और मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
क्या है पद्मा बैराज परियोजना?
भारत में बहने वाली Ganges नदी जब बांग्लादेश में प्रवेश करती है तो उसे पद्मा नदी कहा जाता है। इसी नदी पर बैराज बनाने की योजना प्रस्तावित की गई है।
बांग्लादेश सरकार का दावा है कि इस परियोजना से देश के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों को सिंचाई, जल प्रबंधन और कृषि में फायदा मिलेगा। साथ ही बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण में भी मदद मिलने की बात कही जा रही है।
एक्सपर्ट्स क्यों जता रहे चिंता?
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पद्मा नदी बेहद संवेदनशील और विशाल जल प्रणाली का हिस्सा है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बड़े स्तर पर बदलाव से:
- बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है
- नदी कटाव तेज हो सकता है
- मत्स्य संसाधनों पर असर पड़ सकता है
- लाखों लोगों के विस्थापन की स्थिति बन सकती है
- पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है
कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बैराज के कारण तलछट (sediment) जमा होने से नदी की धारा बदल सकती है, जिससे कई इलाके जलभराव और तबाही की चपेट में आ सकते हैं।
भारत में भी बढ़ी चिंता
चूंकि गंगा नदी भारत और बांग्लादेश दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है, इसलिए इस परियोजना को लेकर भारत में भी चिंता जताई जा रही है।
जल विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार नदियों पर बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए दोनों देशों के बीच समन्वय और वैज्ञानिक अध्ययन बेहद जरूरी होता है। बिना साझा रणनीति के भविष्य में जल विवाद और पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ सकती हैं।
यह भी पढ़ें…
तेल सप्लाई में सऊदी को झटका, भारत के टॉप-3 में पहुंचा वेनेजुएला…
अभी शुरुआती चरण में है परियोजना
फिलहाल पद्मा बैराज परियोजना केवल प्रस्तावित चरण में है और इसके निर्माण को लेकर विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन, तकनीकी सर्वे और वित्तीय योजना पर काम होना बाकी है।
हालांकि, परियोजना की घोषणा के बाद ही इसे लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस शुरू हो गई है।
यह भी पढ़ें…
Iran युद्ध पर ट्रम्प की बढ़ीं मुश्किलें, अमेरिकी संसद में पास हुआ बड़ा प्रस्ताव…
बांग्लादेश के लिए वरदान या खतरा?
समर्थकों का कहना है कि यह परियोजना जल प्रबंधन और कृषि विकास के लिहाज से बांग्लादेश के लिए फायदेमंद हो सकती है। वहीं आलोचकों का मानना है कि गलत योजना या जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में बड़ी प्राकृतिक आपदा का कारण बन सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बांग्लादेश सरकार इस परियोजना को किस तरह आगे बढ़ाती है और क्या क्षेत्रीय विशेषज्ञों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाता है।
यह भी पढ़ें…





