
Kuno नेशनल पार्क में राष्ट्रपति का दौरा, चीतों को जंगल में छोड़ सकती हैं मुर्मु…
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार बोत्सवाना से भारत लाए गए जिन चीतों को अभी तक पूरी तरह जंगल में नहीं छोड़ा गया है, उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों रिलीज कराया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय कार्यक्रम की आधिकारिक स्वीकृति के बाद लिया जाएगा।
गौरतलब है कि जब बोत्सवाना से चीतों को भारत भेजने के लिए चयनित किया गया था, तब प्रतीकात्मक रूप से इन चीतों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ही सौंपा गया था। ऐसे में राष्ट्रपति के हाथों चीतों की रिहाई को परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।
चीता प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ी उत्सुकता
कूनो नेशनल पार्क पिछले कुछ वर्षों से देश और दुनिया में चीता पुनर्स्थापन परियोजना को लेकर चर्चा में रहा है। अफ्रीकी देशों से लाए गए चीतों को भारत के जंगलों में बसाने की यह महत्वाकांक्षी योजना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।
चीतों की निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और उनके व्यवहार पर लगातार विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। कई चीतों को सफलतापूर्वक खुले जंगल में छोड़ा जा चुका है, जबकि कुछ को अभी निगरानी वाले बाड़ों में रखा गया है।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं की तैयारी तेज
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए कूनो नेशनल पार्क और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों और वन विभाग की टीमों ने तैयारियों का जायजा लेना शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर हेलीपैड, आवागमन मार्ग, विश्राम स्थल और कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी लगातार दौरा कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
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पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति के दौरे और चीता प्रोजेक्ट से जुड़ी गतिविधियों के कारण कूनो नेशनल पार्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी। इससे वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चीता प्रोजेक्ट के कारण क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। होटल, गाइड सेवा और स्थानीय कारोबार को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
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देशभर की नजरें कूनो पर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित दौरे के बाद अब देशभर की नजरें कूनो नेशनल पार्क पर टिक गई हैं। अगर राष्ट्रपति के हाथों चीतों की रिहाई होती है तो यह चीता प्रोजेक्ट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण माना जाएगा।
वन विभाग और प्रशासन को उम्मीद है कि यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ भारत की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई पहचान देगा।
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