
तृणमूल में दरार से बीजेपी को फायदा? बंगाल से ज्यादा दिल्ली पर नजर…
Politics: अंदरूनी संकट और संभावित टूट की चर्चाओं से घिर गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि अगर तृणमूल कांग्रेस कमजोर होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आखिर किसे मिलेगा? विश्लेषकों का मानना है कि इसका सीधा राजनीतिक लाभ भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मिल सकता है।
तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से बीजेपी के खिलाफ सबसे मुखर क्षेत्रीय दलों में शामिल रही है। संसद में पार्टी की मौजूदगी और ममता बनर्जी की आक्रामक राजनीति ने विपक्ष को एक अलग ताकत देने का काम किया। लेकिन अब पार्टी के भीतर उभरती असहमति ने राजनीतिक समीकरण बदलने शुरू कर दिए हैं।
क्या ममता भी होंगी क्षेत्रीय दलों की राजनीति की नई शिकार?
देश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े क्षेत्रीय दल अंदरूनी बगावत का शिकार हुए हैं। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार को अपनी ही पार्टी के नेताओं के विद्रोह का सामना करना पड़ा। दोनों नेताओं को पार्टी और चुनाव चिन्ह तक गंवाने पड़े।
अब बंगाल में जिस तरह की राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है, उससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या ममता बनर्जी भी उसी तरह के संकट की ओर बढ़ रही हैं? हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक संकेत लगातार अस्थिरता की ओर इशारा कर रहे हैं।
बीजेपी को क्यों दिख रहा बड़ा मौका?
पश्चिम बंगाल में बीजेपी फिलहाल विपक्ष में है और सरकार गिराने जैसी कोई तात्कालिक स्थिति नहीं दिख रही। फिर भी पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को बड़े राजनीतिक अवसर के तौर पर देख रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह संसद की राजनीति मानी जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष की एक महत्वपूर्ण ताकत रही है। अगर पार्टी के सांसदों में बिखराव होता है या संख्या घटती है, तो बीजेपी को विधायी मामलों में आसानी मिल सकती है। खासकर ऐसे समय में जब केंद्र सरकार कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर कानून लाने की तैयारी में रहती है।
यह भी पढ़ें…
Delhi Fire: दिल्ली होटल मेंअग्निकांड में अबतक 21 मौते, अपनों को ढूंढ रहे परिजन…
विपक्षी एकता को लग सकता है झटका
बीजेपी के खिलाफ मजबूत विपक्ष तैयार करने की कोशिशें पिछले कई वर्षों से जारी हैं, लेकिन विपक्षी दलों के बीच नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं। ममता बनर्जी भी खुद को राष्ट्रीय विपक्ष के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करने की कोशिश करती रही हैं।
अगर तृणमूल कांग्रेस कमजोर होती है, तो विपक्ष की सामूहिक ताकत पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। इससे बीजेपी को राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूत स्थिति मिल सकती है।
यह भी पढ़ें…
CBSE पोर्टल पर साइबर अटैक की कोशिश, बोर्ड ने छात्रों को किया सतर्क…
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल बंगाल की राजनीति पूरी तरह अनिश्चितता के दौर में दिखाई दे रही है। तृणमूल कांग्रेस इस संकट को कितना संभाल पाती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि बंगाल में पैदा हुई यह राजनीतिक हलचल सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहने वाली।
दिल्ली की राजनीति, संसद के समीकरण और विपक्ष की रणनीति—तीनों पर इसका असर पड़ सकता है। यही वजह है कि अब पूरे देश की नजरें बंगाल की राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
यह भी पढ़ें…





