जो संकटों का सामना कर आगे बढ़ता है, वही सफलता के शिखर तक पहुंचता है:Modi

Prime Minister Narendra Modi Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सुभाषित शेयर किया है, जिसमें चुनौतियों का सामना कर सफलता के शिखर तक पहुंचने का संदेश दिया गया है। पीएम मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति। संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥” शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि जो मनुष्य चुनौतियों का सामना करने का साहस नहीं रखता, उसके लिए सफलता का मार्ग कठिन बना रहता है। किंतु जो व्यक्ति साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ संकटों का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ता है, वही जीवन में सफलता के शिखर तक पहुंचता है।

प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक महाभारत के शांतिपर्व के 138वें अध्याय के 34वें श्लोक से लिया गया है। इस श्लोक के माध्यम से संदेश दिया गया है कि महान सफलता या लक्ष्य प्राप्ति के लिए जीवन में जोखिम लेना अनिवार्य है। बिना जोखिम उठाए बड़ी उपलब्धियां नहीं मिलती।

इस श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि मनुष्य बिना किसी खतरे या जोखिम (संशय) में पड़े कभी कल्याण या श्रेष्ठ फल नहीं देख पाता, और अगर वह संकट या जोखिम मोल लेता है और जीवित बच जाता है, तभी उसे वास्तविक सफलता या सुख देखने को मिलते हैं। यानी जीवन में बड़ी उपलब्धियां या तरक्की बिना किसी अनिश्चितता या जोखिम का सामना किए संभव नहीं हैं।

इसके माध्यम से कहा गया है कि जोखिम उठाना जरूरी है, लेकिन पूरी बुद्धिमत्ता और सावधानी के साथ, जिससे कि उस संकट को पार करके जीवित रह सके और फल का आनंद लिया जा सके। प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस श्लोक के माध्यम से संदेश दिया गया है कि लोगों को चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता के शिखर पर पहुंचना चाहिए।

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