हर शो में खाली रहती है सीट नंबर 9! जानिए नीम करोली बाबा से जुड़ा रहस्य…

‘हनुमान अंश’ के हर शो में सीट नंबर 9 खाली रखने की चर्चा, नीम करोली बाबा की मौजूदगी और आशीर्वाद से जुड़ी बताई जा रही है यह मान्यता

Hanuman Ansh: नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने सीमित संसाधनों के बावजूद दर्शकों का ध्यान खींचा है। फिल्म की कहानी बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और भगवान हनुमान के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा के इर्द-गिर्द बुनी गई है।

हालांकि फिल्म की कहानी और कमाई के आंकड़ों के बीच एक और बात लगातार सुर्खियां बटोर रही है। बताया जा रहा है कि कुछ सिनेमाघरों में फिल्म के शो के दौरान सीट नंबर 9 खाली रखी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस सीट पर किसी दर्शक को क्यों नहीं बैठाया जाता?

हर शो में सीट नंबर 9 क्यों रहती है खाली?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ जगहों पर ‘हनुमान अंश’ की स्क्रीनिंग के दौरान सीट नंबर 9 को जानबूझकर खाली रखा जा रहा है। इसे फिल्म से जुड़े श्रद्धा और आध्यात्मिक भाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

बताया जाता है कि यह सीट प्रतीकात्मक तौर पर नीम करोली बाबा के लिए आरक्षित मानी जाती है। इसके पीछे भावना यह है कि बाबा की उपस्थिति और उनका आशीर्वाद फिल्म देखने वाले दर्शकों के बीच बना रहे।

हालांकि, सीट नंबर 9 को लेकर अलग-अलग आध्यात्मिक मान्यताएं और दावे सामने आते हैं। इसलिए इसे किसी आधिकारिक नियम के बजाय फिल्म से जुड़े श्रद्धा भाव और प्रतीकात्मक पहल के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।

सिर्फ 2 करोड़ के बजट में बनी है फिल्म
‘हनुमान अंश’ का बजट करीब 2 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। बड़े सितारों और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों के बीच कम लागत में बनी इस फिल्म की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि इसने दर्शकों के एक वर्ग के साथ भावनात्मक जुड़ाव कायम किया है।

फिल्म में नीम करोली बाबा के जीवन, उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व और भगवान हनुमान के प्रति उनकी भक्ति को प्रमुखता दी गई है। यही आध्यात्मिक और भावनात्मक पक्ष फिल्म की कहानी को बाकी फिल्मों से अलग बनाता है।

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सोशल मीडिया पर भी सीट नंबर 9 की चर्चा
सीट नंबर 9 को खाली रखने की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। बाबा के अनुयायी इसे श्रद्धा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे फिल्म के प्रचार और दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाने वाली पहल भी मान रहे हैं।

फिलहाल सीट नंबर 9 को लेकर सामने आ रही जानकारी को आध्यात्मिक मान्यता और श्रद्धा से जुड़ी पहल के रूप में ही देखा जा रहा है। इसके पीछे कोई आधिकारिक सिनेमाघर नियम होने की पुष्टि नहीं हुई है।

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भक्ति और भावनाओं ने बनाई अलग पहचान
‘हनुमान अंश’ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि फिल्म ने बड़े बजट और बड़े स्टार्स के बजाय कहानी, आस्था और भावनात्मक जुड़ाव के जरिए दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है।

नीम करोली बाबा और भगवान हनुमान से जुड़ी आस्था फिल्म को एक अलग दर्शक वर्ग तक पहुंचा रही है। यही वजह है कि फिल्म की चर्चा सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं है, बल्कि थिएटर में सीट नंबर 9 जैसी आध्यात्मिक मान्यताएं भी लोगों की उत्सुकता बढ़ा रही हैं।

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