
लखनऊ में श्रीराम कथा: पंचम दिवस पर गूंजी भरत प्रेम और वनगमन की भावपूर्ण गाथा
Lucknow: राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विपुल खंड में ‘हिंदू मेला आवाहन मंच’ के तत्वावधान में आयोजित दिव्य श्रीराम कथा के पांचवें दिन का प्रसंग अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी रहा। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पूज्य आचार्य डॉ. चंद्रांशु जी महाराज के श्रीमुख से प्रभु श्रीराम के वनगमन और भरत चरित्र का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया।
कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने त्याग, समर्पण, पारिवारिक मर्यादा और भ्रातृप्रेम के उन आदर्शों को आत्मसात किया, जो आज के आधुनिक युग में भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक हैं प्रभु श्रीराम
आचार्य श्री ने श्रीराम के वनगमन प्रसंग का विस्तार से बखान करते हुए बताया कि जीवन में आने वाली हर कठिन परिस्थिति के पीछे धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण का कोई न कोई गहरा उद्देश्य छुपा होता है। प्रभु श्रीराम ने राजसुख का सहजता से त्याग कर मर्यादा और पितृवचन की रक्षा को सर्वोपरि रखा। वहीं दूसरी ओर, भरत जी ने अयोध्या के राजसिंहासन को अपने पास रखने के बजाय प्रभु श्रीराम के चरणों की खड़ाऊँ को सिंहासन पर रखकर उनके प्रति अपनी अनन्य निष्ठा और त्याग का अद्भुत परिचय दिया।
कथा के दौरान आचार्य जी ने समझाया कि भरत चरित्र यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम और स्नेह कभी अधिकार जताने की मांग नहीं करता, बल्कि हमेशा त्याग करना सिखाता है। भगवान राम और उनके भाइयों का आपसी प्रेम और समर्पण हमारी महान भारतीय परिवार व्यवस्था का सबसे बड़ा स्तंभ है। वर्तमान समय में जब पारिवारिक रिश्तों में स्वार्थ और दूरियां बढ़ रही हैं, तब श्रीराम का चरित्र हमें प्रेम, विश्वास और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा का छठा दिवस: सीता हरण और लंका दहन का प्रसंग
दिव्य श्रीराम कथा के आगामी छठे दिवस पर माता सीता के हरण, प्रभु श्रीराम के विरह, भक्त हनुमान की अद्वितीय भक्ति व पराक्रम और लंका दहन के रोमांचकारी प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। यह प्रसंग भक्तों को भक्ति की शक्ति, साहस, अटूट निष्ठा और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष करने का संदेश देगा।
हिंदू मेला आवाहन मंच समिति की ओर से सभी नगरवासियों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे भारी संख्या में सपरिवार पहुंचकर कथा का लाभ उठाएं। श्री वेदांतिकुलम आवासीय गुरुकुल की अध्यक्ष करिश्मा सिंह ने कहा कि इस प्रकार की कथाओं का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंगों का श्रवण करना नहीं है, बल्कि अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कारों और सनातन मूल्यों को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना है।





