
UP की सियासत में पेड़ों की मिसाल, सीटों के सवाल पर कांग्रेस-सपा ने रखी अपनी बात…
UP Politics: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विपक्षी गठबंधन INDIA में शामिल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। दोनों दल सार्वजनिक तौर पर गठबंधन की एकजुटता की बात कर रहे हैं, लेकिन सीटों को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में भी जुटे हैं।
इस सियासी खींचतान के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के एक बयान ने चर्चा को और बढ़ा दिया है। अजय राय ने कांग्रेस की तुलना बरगद के पेड़ से करते हुए कहा कि बरगद सभी को छांव देता है और उसके नीचे सभी के लिए जगह होती है। उनके इस बयान को गठबंधन में कांग्रेस की बड़ी भूमिका और सीटों पर मजबूत दावेदारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने बताया खुद को बरगद
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस एक पुरानी और मजबूत राजनीतिक पार्टी है, जिसने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बरगद का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह बरगद का पेड़ लंबे समय तक खड़ा रहता है और सभी को सहारा देता है, उसी तरह कांग्रेस भी सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान के जरिए कांग्रेस ने यूपी में गठबंधन के भीतर अपनी अहमियत और ज्यादा सीटों की उम्मीद का संदेश देने की कोशिश की है।
सपा ने ‘आम के पेड़’ से किया पलटवार
कांग्रेस के बरगद वाले बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से भी जवाब आया। सपा नेता रवि दास मल्होत्रा ने सपा को आम का पेड़ बताते हुए कहा कि आम का पेड़ भी लोगों को छांव देता है और मीठे फल देता है।
सपा के इस जवाब को कांग्रेस के दावे के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में उसकी जमीनी पकड़ और जनाधार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अखिलेश पहले ही दे चुके हैं संकेत
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि गठबंधन में मुद्दा केवल सीटों की संख्या नहीं बल्कि चुनाव जीतने की रणनीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि बातचीत का आधार जीत की संभावना और जमीनी स्थिति होनी चाहिए।
हालांकि, चुनाव नजदीक आने के साथ ही गठबंधन में सीटों को लेकर दबाव की राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस जहां अपने विस्तार और संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं सपा प्रदेश में अपने प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका को बनाए रखना चाहती है।
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लोकसभा चुनाव के बाद बढ़ी उम्मीदें
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के बाद दोनों दलों का आत्मविश्वास बढ़ा है। कांग्रेस और सपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और इसका राजनीतिक लाभ भी दोनों पार्टियों को मिला था।
अब विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों दल सीट बंटवारे में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस जहां अधिक सीटों की मांग कर सकती है, वहीं सपा अपने मजबूत क्षेत्रों में ज्यादा सीटें छोड़ने के पक्ष में नहीं होगी।
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गठबंधन की एकता के लिए सीट बंटवारा अहम
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, INDIA गठबंधन की सफलता काफी हद तक सीटों के तालमेल पर निर्भर करेगी। यदि दोनों दल समय रहते सहमति बना लेते हैं तो गठबंधन को मजबूती मिल सकती है, लेकिन सीटों को लेकर मतभेद बढ़े तो इसका असर चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल यूपी की राजनीति में ‘बरगद’ और ‘आम के पेड़’ की यह सियासी चर्चा गठबंधन के अंदर चल रही सीटों की खींचतान को उजागर कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और सपा सीट बंटवारे को लेकर किस फार्मूले पर सहमत होती हैं।
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